विस्तृत उत्तर
महेश्वर कवचम् में शिव के निम्नलिखित दिव्य आयुधों का उल्लेख है:
- ▸पाश (रस्सी)
- ▸त्रिशूल
- ▸खड्ग (तलवार)
- ▸वज्र
श्लोक 5 में कहा गया है: 'भूतेशः सकलाङ्गानि पाश-त्रिशूल-खड्ग-वज्रधरः सदा रक्षतु माम्' — भूतों के स्वामी, जो इन दिव्य अस्त्रों को धारण करते हैं, वे मेरे सभी अंगों की सदैव रक्षा करें।
ध्यान में भी महेश्वर को इन्हीं दिव्य आयुधों को धारण किए हुए देखा जाता है जो भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर हैं।





