विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पाप के परिणामों का इस जन्म से लेकर परलोक तक का वर्णन है।
इस जन्म में — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'पाप करने वाले व्यक्ति को न केवल जीवित रहते हुए कष्ट झेलने पड़ते हैं, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी यमलोक में कठोर दंड भुगतना पड़ता है।' जीवन में रोग, दुर्भाग्य, व्यापार-हानि और संबंधों में कलह इसके संकेत हैं।
मृत्यु के समय — पापी को मृत्यु के समय अत्यंत कष्ट होता है। यमदूत भयंकर रूप में आते हैं और आत्मा को पाश में बांधकर घसीटते हैं।
यमलोक में — चित्रगुप्त पाप-पुण्य का लेखा-जोखा यमराज के सामने रखते हैं। पाप की मात्रा के अनुसार दंड का निर्णय होता है।
नरक में — पाप के अनुसार विशिष्ट नरक में दंड भोगना पड़ता है।
पुनर्जन्म में — गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय में — 'नरकों में दंड भोगकर अंत में अंधतामिस्त्र नरक में जा गिरता है।' फिर पुनः जन्म लेता है — परंतु अधम योनियों में।
संक्षेप में — पाप का परिणाम है — जीवन में कष्ट → मृत्यु में पीड़ा → यमलोक में दंड → नरक-यातना → अधम योनि में पुनर्जन्म।



