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पाप करने से क्या परिणाम होता है?

पाप के परिणाम — इस जन्म में रोग-दुर्भाग्य, मृत्यु में पीड़ा, यमलोक में लेखा, नरक में विशिष्ट यातना और अधम योनि में पुनर्जन्म।

संक्षिप्त उत्तर

पाप के परिणाम — इस जन्म में रोग-दुर्भाग्य, मृत्यु में पीड़ा, यमलोक में लेखा, नरक में विशिष्ट यातना और अधम योनि में पुनर्जन्म। 'मनुष्य के कर्म ही उसके भविष्य का निर्माण करते हैं।'

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में पाप के परिणामों का इस जन्म से लेकर परलोक तक का वर्णन है।

इस जन्म में — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'पाप करने वाले व्यक्ति को न केवल जीवित रहते हुए कष्ट झेलने पड़ते हैं, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी यमलोक में कठोर दंड भुगतना पड़ता है।' जीवन में रोग, दुर्भाग्य, व्यापार-हानि और संबंधों में कलह इसके संकेत हैं।

मृत्यु के समय — पापी को मृत्यु के समय अत्यंत कष्ट होता है। यमदूत भयंकर रूप में आते हैं और आत्मा को पाश में बांधकर घसीटते हैं।

यमलोक में — चित्रगुप्त पाप-पुण्य का लेखा-जोखा यमराज के सामने रखते हैं। पाप की मात्रा के अनुसार दंड का निर्णय होता है।

नरक में — पाप के अनुसार विशिष्ट नरक में दंड भोगना पड़ता है।

पुनर्जन्म में — गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय में — 'नरकों में दंड भोगकर अंत में अंधतामिस्त्र नरक में जा गिरता है।' फिर पुनः जन्म लेता है — परंतु अधम योनियों में।

संक्षेप में — पाप का परिणाम है — जीवन में कष्ट → मृत्यु में पीड़ा → यमलोक में दंड → नरक-यातना → अधम योनि में पुनर्जन्म।

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