विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में प्रेत-मुक्ति के अनेक उपायों का वर्णन है।
शास्त्रोक्त संस्कार — दशगात्र (10 दिन के पिंडदान), षोडश श्राद्ध (16 प्रकार के श्राद्ध) और सपिंडन विधान — ये मुख्य संस्कार हैं जिनसे प्रेत-शरीर से मुक्ति मिलती है। Garuda Purana में कहा गया है — 'जब शास्त्रोक्त विधि से उसका प्रेत-संस्कार, दशगात्र वधान, षोडश श्राद्ध, सपिण्डन विधान किया जाता है, तब वह प्रेत-शरीर से मुक्त हो जाता है।'
प्रेत घट दान — विशेषकर पुत्र द्वारा एक सोने के घड़े में कुशा, तिल आदि रखकर दान करने से प्रेत को विशेष मुक्ति मिलती है।
गरुड़ पुराण पाठ — मृत्यु के बाद 10-13 दिनों तक गरुड़ पुराण का पाठ कराने से आत्मा को शांति मिलती है।
नारायण बलि — अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माओं के लिए नारायण बलि पूजा विशेष रूप से की जाती है।
गया श्राद्ध — गया में पिंडदान करने से पितर तृप्त होते हैं और प्रेत-आत्माएँ मुक्त होती हैं।
भक्ति और दान — परिजनों द्वारा जीव के नाम पर किए गए दान, भोजन और गरीबों की सेवा से भी प्रेत को लाभ मिलता है।





