विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में प्रेतकल्प के श्रोताओं का वर्णन परंपरागत और शास्त्रीय दृष्टि से किया गया है।
मृत आत्मा को — मृत्यु के 13 दिनों में जब गरुड़ पुराण का पाठ होता है तो यह माना जाता है कि मृत आत्मा भी इसे सुनती है। 'शास्त्रों के अनुसार मृतक की आत्मा गरुड़ पुराण की कथा को सुनती है जिससे उसे मुक्ति मिल सके।'
परिजनों को — परिवार के शोकाकुल सदस्यों को — ताकि वे समझें कि मृत्यु के बाद क्या होता है, अपने प्रिय की आत्मा की स्थिति जानें और क्या कर्तव्य करने हैं — यह सब जानें।
प्रेत-संस्कार करने वाले पुरोहित को — जो विधि-संचालन करते हैं, उन्हें भी यह ज्ञान आवश्यक है।
जिज्ञासु श्रोताओं को — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'जो मनुष्य इसका पाठ करता है या सुनता है, वह पापमुक्त होकर स्वर्ग प्राप्त करता है।' अतः जीवित जिज्ञासु भी इसके श्रोता हैं।
सभी वर्णों को — गरुड़ पुराण सर्व-साधारण के लिए है।



