विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में श्राद्ध करने के कारणों का अत्यंत विस्तृत और प्रेरणादायक वर्णन है।
पितर-ऋण चुकाने के लिए — सनातन धर्म में तीन ऋण माने गए हैं — देव-ऋण, ऋषि-ऋण और पितृ-ऋण। श्राद्ध पितृ-ऋण चुकाने का साधन है।
पितरों की तृप्ति के लिए — गरुड़ पुराण में बताया गया है — 'जो परिजन अपने शरीर को छोड़कर जा चुके हैं, वे चाहे किसी भी लोक में हों, तर्पण से उन्हें तृप्ति प्राप्त होती है।'
प्रेत-मुक्ति के लिए — श्राद्ध प्रेत को 'पितर' की श्रेणी में लाता है। गरुड़ पुराण में सपिंडन विधान के बाद प्रेत मुक्त होता है।
परिवार की कल्याण-कामना — 'पितर भूलोक पर आते हैं और तर्पण-पिंडदान से तृप्त होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं।'
पापों का प्रायश्चित — गरुड़ पुराण में श्राद्ध को एक प्रकार का प्रायश्चित भी बताया गया है।
गरुड़ पुराण में यह भी चेतावनी है — 'जब तक पितरों की आत्मा संतुष्ट नहीं होती, तब तक उनके वंशजों को अनेक प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है।'





