विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में श्राद्ध के पदार्थों का विस्तृत वर्णन है।
तिल — श्राद्ध में काले तिल का विशेष महत्व है। गरुड़ पुराण के अनुसार तर्पण में तिल अनिवार्य है। 'जल में दूध और तिल मिलाकर तर्पण करना चाहिए' — यह नियम है।
कुश (दर्भ) — कुश के बिना श्राद्ध अधूरा है। कुश से अंगूठी (पवित्री) बनाकर पहनी जाती है।
जल, दूध — तर्पण के लिए जल और दूध अनिवार्य हैं। तांबे, चांदी या पीतल के पात्र में होना चाहिए।
जौ, चावल, गेहूँ — पिंड बनाने के लिए इनका उपयोग होता है। गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में 'सप्तधान्य' (धान, जौ, गेहूँ, मूँग, उड़द, काकुन, चना) का उल्लेख है।
तुलसी — श्राद्ध में तुलसी का उपयोग अत्यंत पवित्र है।
सफेद फूल — श्राद्ध में सफेद फूलों का उपयोग होता है। लाल फूल निषेध हैं।
गंगाजल — श्राद्ध और तर्पण में गंगाजल का विशेष महत्व है।
ब्राह्मण-भोजन में — मिष्टान्न, खीर, पूड़ी आदि पकाए जाते हैं।




