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विस्तृत उत्तर
ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करते समय श्रीराम ने ताड़का के पुत्र सुबाहु का वध करने के लिए आग्नेयास्त्र (कुछ वर्णनों में अनलास्त्र) का सफलतापूर्वक प्रयोग किया था। यह धर्म की रक्षा के लिए दिव्यास्त्र के न्यायोचित उपयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। सुबाहु और उसके साथी राक्षस यज्ञ में विघ्न डालने आए थे और श्रीराम ने आग्नेयास्त्र से उन्हें भस्म करके यज्ञ को निर्विघ्न संपन्न कराया।
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