विस्तृत उत्तर
महाभारत के 14वें दिन की रात्रि वासवी शक्ति और घटोत्कच का प्रसंग है।
रात्रि-युद्ध का संकट — महाभारत का युद्ध उस दिन सूर्यास्त के बाद भी चलता रहा (जयद्रथ-वध के कारण)। रात्रिकाल में घटोत्कच की असुर-शक्ति कई गुनी बढ़ गई। वह कौरव-सेना पर भयंकर तबाही मचाने लगा। कौरव सेना में हाहाकार था।
दुर्योधन का अनुरोध — दुर्योधन ने कर्ण से निवेदन किया कि घटोत्कच से सेना को बचाना होगा वरना इसी रात कौरव-सेना नष्ट हो जाएगी। यदि इसे न रोका तो पूरी सेना का विनाश हो जाएगा।
कर्ण की विवशता — कर्ण मित्र-धर्म से बँधे थे। दुर्योधन की मित्रता और कर्तव्य के लिए उन्होंने वासवी शक्ति घटोत्कच पर चला दी। घटोत्कच का उसी वाण से वध हुआ।
परिणाम — श्रीकृष्ण यह देखकर प्रसन्न हुए क्योंकि वे जानते थे कि अर्जुन का सबसे बड़ा खतरा टल गया। कर्ण की सबसे बड़ी शक्ति व्यय हो गई थी।





