विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण में यमदूतों के आगमन के विषय में स्पष्ट वर्णन है। यमदूत मुख्यतः उन जीवात्माओं को लेने आते हैं जिन्होंने जीवन में पापकर्म किए हों, धर्म का पालन न किया हो और जिनके कर्मों का लेखा-जोखा यमलोक में होना हो।
विष्णु पुराण में अजामिल की प्रसिद्ध कथा है। अजामिल ने अपने जीवन भर पाप किए, परंतु मृत्युकाल में उसने अपने पुत्र 'नारायण' का नाम पुकारा। इस नाम-उच्चारण के कारण विष्णुदूत पहले पहुँच गए और यमदूतों को उसकी आत्मा ले जाने से रोक दिया। इस कथा से यह सिद्धांत निकलता है — जो ईश्वर की शरण में हो, उसे यमदूत नहीं ले जाते।
गरुड़ पुराण के अनुसार — जिन लोगों ने जीवन भर भगवान का नाम जपा, तीर्थ किया, दान किया और धर्म का आचरण किया — उनके लिए यमदूत नहीं, देवदूत आते हैं और वे दिव्य गति को प्राप्त होते हैं।
यमदूत केवल यमराज के आदेश से आते हैं और केवल वे आत्माएँ उनके अधिकार में होती हैं जो भगवान की शरण से बाहर हैं।





