विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमदूतों द्वारा नरक का वर्णन करने के विषय में एक स्पष्ट प्रयोजन बताया गया है। यमदूत यममार्ग पर पापी जीव को नरक की यातनाओं का वर्णन सुनाते हैं — यह उस जीव के कर्मों के न्याय की प्रक्रिया का अंग है।
इस वर्णन के कई प्रयोजन हैं। पहला — यह जीव को उसके कर्मों का बोध कराता है। मृत्यु के बाद जीव अपने पापकर्मों को भूल नहीं सकता — यमदूत उसे बार-बार याद दिलाते हैं कि उसने क्या किया और उसका क्या फल मिलने वाला है। दूसरा — यह एक प्रकार का पश्चाताप जगाना है। जीव जानता है कि अब कुछ बदला नहीं जा सकता परंतु अगले जन्म में सुधार की संभावना रहती है। तीसरा — यह न्याय की प्रक्रिया है — यमलोक में चित्रगुप्त और यमराज के समक्ष जब न्याय होता है, उससे पूर्व जीव को अपने कर्मों का बोध होना आवश्यक है।
गरुड़ पुराण का यह वर्णन वास्तव में जीवित मनुष्यों को एक संदेश भी देता है — ये वर्णन पढ़-सुनकर मनुष्य को समझना चाहिए कि पाप का मार्ग अंततः कितना कष्टकारी है। गरुड़ पुराण का मूल उद्देश्य ही यही है — मनुष्य को धर्म के मार्ग पर प्रेरित करना।





