विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमदूतों के भयानक स्वरूप का वर्णन केवल काल्पनिक चित्रण नहीं है — इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक और नैतिक प्रयोजन है।
पहला प्रयोजन — यह वर्णन पापकर्मों के परिणाम की चेतावनी है। गरुड़ पुराण का मूल उद्देश्य ही मनुष्य को जीवन में धर्म के मार्ग पर प्रेरित करना है। यमदूतों का भयावह रूप पापी जीव के उस कर्म-बोझ का दर्पण है जो उसने जीवन में संचित किया था। वे जो भय उत्पन्न करते हैं, वह पाप का नैसर्गिक परिणाम है।
दूसरा प्रयोजन — यह न्याय के निष्ठुर होने का प्रतीक है। जब पाप का न्याय होता है, तो वह करुणा से नहीं, नियम से होता है। यमदूतों का भयावह स्वरूप यह बताता है कि धर्म का न्याय निर्मम और निरपेक्ष है — कोई रिश्ता, कोई पैसा, कोई सिफारिश वहाँ काम नहीं आती।
तीसरा प्रयोजन — यह जीवित मनुष्यों को सतर्क करने के लिए है। गरुड़ पुराण का पाठ मृत्यु के बाद किया जाता है ताकि परिजन भी इसे सुनकर अपने जीवन को धर्म के अनुसार संवारें।
इस प्रकार यमदूतों का भयानक स्वरूप एक आध्यात्मिक प्रतीक है — यह पाप, अधर्म और ईश्वर-विस्मरण का स्वाभाविक परिणाम है।





