विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के द्वितीय और तृतीय अध्यायों में यममार्ग पर कष्ट के विभिन्न स्थानों का विशद वर्णन है।
गर्म बालू वाला मैदान — 'तपी हुई बालू से पूर्ण मार्ग' — यहाँ नंगे पैर चलने पर असहनीय जलन होती है। यमदूत पीठ पर कोड़े मारते हैं।
असिपत्रवन — यह दो हजार योजन विस्तारवाला एक भयंकर नरक-जैसा वन है जिसका उल्लेख गरुड़ पुराण के द्वितीय अध्याय में मिलता है। यहाँ 'असि' (तलवार) के आकार के पत्तों वाले वृक्ष हैं जो काटते हैं।
वैतरणी नदी — इस भयावह नदी में 34-47 दिनों तक यातना भोगनी पड़ती है।
सिंह-व्याघ्र-कुत्तों वाला मार्ग — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'कहीं सिंहों, व्याघ्रों और भयंकर कुत्तों द्वारा खाया जाता है।'
सर्प-बिच्छू वाला मार्ग — 'कहीं महाविषधर सर्पों के द्वारा डसा जाता है, कहीं बिच्छुओं द्वारा डसा जाता है।'
आग से जलाया जाने वाला स्थान — 'कहीं उसे आग से जलाया जाता है।'
बर्फीली हवा — 'कभी बर्फीली हवा से पीड़ित होता है।'
इस प्रकार यममार्ग का कोई भी हिस्सा पापी के लिए सुखद नहीं है।




