ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

यममार्ग में यात्रा लंबी क्यों होती है?

संक्षिप्त उत्तर

यममार्ग की यात्रा लंबी इसलिए होती है क्योंकि पाप का भार जीव को धीमा करता है, 16 नदियाँ पार करनी होती हैं, पापी सूक्ष्म शरीर दुर्बल होता है और प्रत्येक कष्ट स्वयं एक कर्मफल है। कर्म ही यात्रा की अवधि तय करते हैं।

📖

विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में यममार्ग की दूरी 99,000 योजन (एक योजन लगभग 13-16 किमी) बताई गई है और जीव को यमलोक तक पहुँचने में 17 से 49 दिन या उससे अधिक का समय लग सकता है। यह यात्रा इतनी लंबी क्यों है — इसके अनेक कारण हैं।

पहला कारण — पाप का भार। जिसने जीवन में अधिक पाप किए हों, उसकी यात्रा और भी दीर्घ और कठिन होती है। पाप का बोझ यात्रा को लंबा खींचता है।

दूसरा कारण — कर्म-न्याय की पूर्णता के लिए। पापी जीव को यात्रा के प्रत्येक चरण में कर्मानुसार अनुभव होता है। 16 बड़ी नदियाँ पार करनी होती हैं, विभिन्न कष्टों से गुजरना होता है। यह सब संपन्न होने में समय लगता है।

तीसरा कारण — सूक्ष्म शरीर की दुर्बलता। पिंडदान से जो शक्ति मिलती है उससे चलना होता है। पापी जीव को कम शक्ति मिलती है और वह थककर बार-बार गिरता है — इससे यात्रा लंबी हो जाती है।

चौथा कारण — यात्रा में होने वाली प्रत्येक यातना स्वयं एक प्रकार का कर्मफल है। इन यातनाओं का अनुभव आवश्यक है।

पुण्यात्माओं की यात्रा सहज होती है — देवदूत उन्हें दिव्य विमान में शीघ्र ले जाते हैं। कर्म ही यात्रा की लंबाई और कठिनाई तय करते हैं।

🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

यममार्गलंबी यात्राकर्मगरुड़ पुराण
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

यममार्ग में यात्रा लंबी क्यों होती है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको जीवन एवं मृत्यु से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#यममार्ग#लंबी यात्रा#कर्म#गरुड़ पुराण