विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यममार्ग की दूरी 99,000 योजन (एक योजन लगभग 13-16 किमी) बताई गई है और जीव को यमलोक तक पहुँचने में 17 से 49 दिन या उससे अधिक का समय लग सकता है। यह यात्रा इतनी लंबी क्यों है — इसके अनेक कारण हैं।
पहला कारण — पाप का भार। जिसने जीवन में अधिक पाप किए हों, उसकी यात्रा और भी दीर्घ और कठिन होती है। पाप का बोझ यात्रा को लंबा खींचता है।
दूसरा कारण — कर्म-न्याय की पूर्णता के लिए। पापी जीव को यात्रा के प्रत्येक चरण में कर्मानुसार अनुभव होता है। 16 बड़ी नदियाँ पार करनी होती हैं, विभिन्न कष्टों से गुजरना होता है। यह सब संपन्न होने में समय लगता है।
तीसरा कारण — सूक्ष्म शरीर की दुर्बलता। पिंडदान से जो शक्ति मिलती है उससे चलना होता है। पापी जीव को कम शक्ति मिलती है और वह थककर बार-बार गिरता है — इससे यात्रा लंबी हो जाती है।
चौथा कारण — यात्रा में होने वाली प्रत्येक यातना स्वयं एक प्रकार का कर्मफल है। इन यातनाओं का अनुभव आवश्यक है।
पुण्यात्माओं की यात्रा सहज होती है — देवदूत उन्हें दिव्य विमान में शीघ्र ले जाते हैं। कर्म ही यात्रा की लंबाई और कठिनाई तय करते हैं।





