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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तरी — 429 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीमद्भागवत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी ने माता-पिता के साथ क्या किया?

धुंधुकारी ने माता-पिता को मार-पीटकर घर के बर्तन उठा लिए और पिता की संपत्ति नष्ट कर दी।

धुंधुकारीमाता-पिताआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी के पाप क्या थे?

धुंधुकारी चोरी, आग लगाना, बालकों को कुएँ में डालना, दीनों को सताना, कुसंग और माता-पिता को मारना जैसे पाप करता था।

धुंधुकारीपापदुराचार
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी कैसा था?

धुंधुकारी महाखल, आचारहीन, क्रोधी, हिंसक, चोर, द्वेषी और बुरे संग में पड़ा हुआ बताया गया है।

धुंधुकारीदुष्ट पुत्रआचारहीन
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण और धुंधुकारी में क्या अंतर था?

गोकर्ण पंडित और ज्ञानी थे, जबकि धुंधुकारी अत्यंत दुष्ट, आचारहीन, हिंसक और माता-पिता को पीड़ित करने वाला निकला।

गोकर्णधुंधुकारीचरित्र
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण जन्म पर लोग क्यों चकित हुए?

लोग इसलिए चकित हुए कि गाय से मनुष्याकार, सुंदर, दिव्य और सुवर्ण-कांति वाला बालक जन्मा था।

गोकर्णअद्भुत जन्मगाय
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण नाम क्यों रखा गया?

गाय से उत्पन्न उस बालक के कान गाय जैसे थे, इसलिए आत्मदेव ने उसका नाम गोकर्ण रखा।

गोकर्णनामगाय
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण कैसे जन्मे?

धुंधुली द्वारा संन्यासी का फल गाय को खिलाने के तीन महीने बाद गाय से मनुष्याकार दिव्य बालक उत्पन्न हुआ; वही गोकर्ण थे।

गोकर्णजन्मगाय
श्रीमद्भागवत

गाय को फल क्यों खिलाया गया?

धुंधुली ने फल स्वयं न खाकर अपनी बहन की सलाह पर परीक्षा के लिये गाय को खिला दिया, जिससे बाद में गोकर्ण जन्मे।

गायफलधुंधुली
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी नाम कैसे पड़ा?

धुंधुली ने बहन से मिले बालक को अपना पुत्र बताकर उसका नाम धुंधुकारी रखा।

धुंधुकारीनामकरणधुंधुली
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी कैसे जन्मा?

धुंधुकारी धुंधुली का वास्तविक पुत्र नहीं था; धुंधुली की बहन ने अपना जन्मा बालक गुप्त रूप से उसे दे दिया।

धुंधुकारीधुंधुलीजन्म
श्रीमद्भागवत

धुंधुली की बहन ने क्या योजना बनाई?

धुंधुली की बहन ने अपना गर्भस्थ बालक जन्म के बाद धुंधुली को देने और बदले में धन लेने की योजना बनाई।

धुंधुलीबहनयोजना
श्रीमद्भागवत

धुंधुली ने पति से क्या झूठ बोला?

धुंधुली ने फल नहीं खाया, पर आत्मदेव के पूछने पर झूठ बोल दिया कि उसने फल खा लिया है।

धुंधुलीझूठआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

धुंधुली को गर्भ से डर क्यों लगा?

धुंधुली को गर्भ से शरीर कमजोर होने, घर का काम रुकने, प्रसव-पीड़ा, नियमों और बाल-पालन के कष्ट का डर लगा।

धुंधुलीगर्भप्रसव
श्रीमद्भागवत

धुंधुली ने फल क्यों नहीं खाया?

धुंधुली ने गर्भ, प्रसव, नियमों और बाल-पालन के कष्टों से डरकर फल नहीं खाया।

धुंधुलीफलगर्भ
श्रीमद्भागवत

पुत्र पाने वाले फल के नियम क्या थे?

संन्यासी ने कहा कि फल खाने वाली स्त्री एक वर्ष तक सत्य, शौच, दया, दान और एक समय भोजन का नियम रखे।

फलपुत्र प्राप्तिसत्य
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को फल किसने दिया?

आत्मदेव को पुत्र-प्राप्ति का फल उस संन्यासी योगी ने दिया, जिसने पहले उन्हें पुत्र-मोह छोड़ने को समझाया था।

आत्मदेवफलसंन्यासी
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव ने संन्यास क्यों नहीं माना?

आत्मदेव ने संन्यास को नीरस कहा और पुत्र-पौत्र से भरे गृहस्थ जीवन को सरस मानकर पुत्र मांगने का हठ किया।

आत्मदेवसंन्यासगृहस्थ
श्रीमद्भागवत

राजा सगर और अंग का उदाहरण क्यों दिया गया?

संन्यासी ने सगर और अंग का उदाहरण यह दिखाने के लिये दिया कि संतान भी दुख का कारण बन सकती है।

राजा सगरराजा अंगआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

संन्यासी ने पुत्र मोह छोड़ने को क्यों कहा?

संन्यासी ने कहा कि कर्म की गति प्रबल है और पुत्र से सुख निश्चित नहीं; संतान के कारण सगर और अंग को भी दुख मिला।

पुत्र मोहसंन्यासीआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को सात जन्म तक पुत्र क्यों नहीं मिलना था?

संन्यासी ने आत्मदेव का प्रारब्ध देखकर कहा कि सात जन्म तक उन्हें किसी भी प्रकार पुत्र प्राप्त नहीं होगा।

आत्मदेवसात जन्मप्रारब्ध
श्रीमद्भागवत

संन्यासी ने आत्मदेव को क्या बताया?

संन्यासी ने आत्मदेव को पुत्र-मोह छोड़ने, कर्म की गति को प्रबल मानने और विवेक से संसार-वासना त्यागने को कहा।

संन्यासीआत्मदेवविवेक
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव ने जीवन को धिक्कार क्यों कहा?

आत्मदेव ने संतानहीन जीवन, घर, धन और कुल को धिक्कार कहा क्योंकि संतान-अभाव से उन्हें सब व्यर्थ लग रहा था।

आत्मदेवसंतानहीन जीवनदुख
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव संन्यासी से क्यों रोए?

आत्मदेव संतान-अभाव के दुख से रोए; वे कहते हैं कि उनका सब कुछ सूना हो गया है और वे प्राण त्यागने आए हैं।

आत्मदेवसंन्यासीसंतान दुख
श्रीमद्भागवत

संतान न मिलने पर आत्मदेव कहाँ गए?

संतान न मिलने से दुखी आत्मदेव घर छोड़कर वन गए और प्यास लगने पर एक तालाब के पास बैठ गए।

आत्मदेववनतालाब

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