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भगवान प्रश्नोत्तरी — 49 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित भगवान विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 49 प्रश्न

लोक

शिशुमार चक्र क्या है?

शिशुमार चक्र भगवान वासुदेव का विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप है जिसमें समस्त ग्रह, नक्षत्र और तारे विभिन्न अंगों में स्थित हैं। इसकी धुरी ध्रुवलोक है।

शिशुमार चक्रस्वर्लोकग्रह नक्षत्र
भक्ति एवं आध्यात्म

जीवन में बहुत कठिनाइयाँ हैं — भगवान क्यों नहीं सुनते?

यह सबसे पुराना और सबसे दर्दनाक प्रश्न है। भगवान सुनते हैं — पर उनका समय और तरीका अलग है। कुछ कष्ट कर्मफल हैं, कुछ परीक्षा। इस समय — भगवान से शिकायत करें, एक दिन एक काम करें, जो ठीक है उसे देखें। 'देर है, अंधेर नहीं।'

कठिनाइयाँभगवानकष्ट
भक्ति एवं आध्यात्म

भगवान पर से विश्वास उठ रहा है — क्या करें?

विश्वास का संकट आना — यह कमजोरी नहीं, गहरे प्रश्नों की शुरुआत है। भगवान से सीधे झगड़ें, गिले करें। सत्य-प्रेम-सेवा न छोड़ें। दूसरों के अनुभव सुनें। समय दें — कई महान भक्त इस संकट से गुजरे और और गहरे हुए।

विश्वासआस्था संकटभगवान
मंदिर ज्ञान

मंदिर में भगवान को शयन कराने की परंपरा क्या है?

रात्रि भोग → पान → शयन श्रृंगार → फूल शय्या → शयन आरती → द्वार बंद। प्रातः: सुप्रभातम् (दक्षिण)/मंगला आरती (उत्तर)। जगन्नाथ: 'बड़ा श्रृंगार भोग' रात 11। भगवान = 24 घंटे सेवा।

शयनपरंपरामंदिर
भक्ति एवं आध्यात्म

भगवान हमारी प्रार्थना सुनते हैं क्या?

हाँ, भगवान सुनते हैं — गीता (9.22) में स्वयं कहा है। वे अन्तर्यामी हैं। प्रार्थना का तत्काल फल मन की शांति है। फल देरी से आए या अलग रूप में — इसके पीछे गहरा कारण है। वे देरी करते हैं, अनदेखा नहीं करते।

प्रार्थनाभगवानविश्वास
प्रणव रूप

शिव ओंकार और सर्वज्ञ कैसे हैं?

स्तुति में शिव को भगवान्, सर्पों के पति, ओंकार और सर्वज्ञ कहा गया है।

ओंकारसर्वज्ञशिव
श्रीमद्भागवत

भक्ति शुरू करके छूट जाए तो क्या नुकसान होता है?

नारदजी कहते हैं कि भगवान के चरणों का भजन शुरू करके बीच में छूट भी जाए तो भक्त का अमंगल नहीं होता।

भक्तिभजनभगवान
श्रीमद्भागवत

सिर्फ धर्म पालन से क्या भगवान मिलते हैं?

नारदजी कहते हैं कि केवल स्वधर्म पालन करने वाले और भगवान का भजन न करने वाले को वास्तविक लाभ क्या मिला, यह विचारणीय है।

धर्म पालनभक्तिस्वधर्म
श्रीमद्भागवत

कर्म भगवान को अर्पित कैसे करें?

नारदजी कहते हैं कि समस्त कर्म पुरुषोत्तम भगवान को समर्पित करना ही संसार के तीन तापों की औषधि है।

कर्म समर्पणभगवानभक्ति योग
श्रीमद्भागवत

भक्ति के बिना ज्ञान अधूरा क्यों है?

नारदजी कहते हैं कि मोक्ष देने वाला निर्मल ज्ञान भी यदि अच्युत भाव से रहित हो तो उसकी शोभा पूर्ण नहीं रहती।

भक्तिज्ञानमोक्ष
श्रीमद्भागवत

भगवान संसार रचकर भी अलग कैसे रहते हैं?

भगवान लीला से संसार की सृष्टि, पालन और संहार करते हैं, पर उसमें आसक्त नहीं होते और सबके भीतर रहते हुए भी स्वतंत्र रहते हैं।

भगवानसृष्टिलीला
श्रीमद्भागवत

क्या भगवान के अवतार अनगिनत हैं?

हाँ, भगवान हरि के अवतार असंख्य बताए गए हैं, जैसे विशाल सरोवर से हजारों धाराएँ निकलती हैं।

असंख्य अवतारहरिभगवान
श्रीमद्भागवत

परशुराम अवतार क्यों हुआ?

परशुराम अवतार तब हुआ जब राजाओं को ब्राह्मणों का द्रोही देखकर भगवान ने क्रोध में पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय-विहीन किया।

परशुराम अवतारक्षत्रियब्राह्मण
श्रीमद्भागवत

नरसिंह अवतार ने हिरण्यकशिपु को कैसे मारा?

नरसिंह अवतार में भगवान ने अत्यंत बलवान हिरण्यकशिपु की छाती अपने नखों से फाड़ दी।

नरसिंह अवतारहिरण्यकशिपुभगवान
श्रीमद्भागवत

वराह अवतार ने पृथ्वी को कैसे बचाया?

वराह अवतार में भगवान ने रसातल में गई हुई पृथ्वी को निकालने के लिए सूकर रूप धारण किया।

वराह अवतारपृथ्वी उद्धारसूकर रूप
श्रीमद्भागवत

भगवान सबमें एक होकर भी अलग-अलग कैसे दिखते हैं?

भगवान एक हैं, पर जैसे एक अग्नि अलग-अलग लकड़ियों में अनेक-सी दिखती है, वैसे ही वे अनेक जीवों में अलग-अलग से जान पड़ते हैं।

भगवानजीवसृष्टि
श्रीमद्भागवत

मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है?

मनुष्य जीवन का उद्देश्य तत्त्व-जिज्ञासा बताया गया है; केवल कर्म, भोग या स्वर्ग-प्राप्ति इसका अंतिम फल नहीं है।

मनुष्य जीवनजीवन उद्देश्यतत्त्व जिज्ञासा
श्रीमद्भागवत

धर्म का असली उद्देश्य क्या है?

धर्म का असली उद्देश्य मोक्ष, भगवान को प्रसन्न करना और जीवन को तत्त्व-जिज्ञासा की ओर ले जाना है।

धर्ममोक्षभगवान
श्रीमद्भागवत

कृष्ण मनुष्य जैसे दिखकर भी भगवान कैसे थे?

कृष्ण लोगों के सामने मनुष्य जैसे आचरण करते थे, पर बलराम के साथ उन्होंने ऐसी लीलाएँ और पराक्रम किए जो मनुष्य नहीं कर सकते।

कृष्णभगवानमानव लीला
श्रीमद्भागवत

भगवान भक्ति से कैसे प्रसन्न होते हैं?

नारदजी कहते हैं कि तप, वेद, ज्ञान और कर्म से नहीं, भगवान भक्ति से वश में होते हैं।

भगवानभक्तिकृष्ण
श्रीमद्भागवत

कृष्ण को कैसे पाएं?

स्रोत के अनुसार भगवान कृष्ण भक्ति से प्राप्त होते हैं; कलियुग में भक्ति ही सार है।

कृष्णभक्तिभगवान
लोक

कर्म का नियम भगवानों पर भी लागू होता है क्या?

कथा के अनुसार कर्म-विधान सब पर समान रूप से लागू होता है।

कर्मभगवानलक्ष्मी
लोक

भगवान जगत से अलग कैसे हैं?

वे जगत में रहते हुए भी उससे बँधे नहीं हैं।

निर्लिप्तभगवानजगत
लोक

भगवान हर जगह कैसे हैं?

भगवान सबमें व्याप्त हैं, पर किसी एक वस्तु में सीमित नहीं।

सर्वव्यापकभगवानचतुःश्लोकी

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