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कलियुग प्रश्नोत्तरी — 53 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित कलियुग विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 53 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

भागवत पारायण क्यों करें?

सनकादि के अनुसार श्रीमद्भागवत पारायण भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बल देकर कलियुग के दोष दूर करता है।

भागवत पारायणज्ञान यज्ञभक्ति
श्रीमद्भागवत

भक्ति क्यों जरूरी है?

कलियुग में भक्ति को मोक्षदायिनी, कृष्ण को वश में करने वाली और भय दूर करने वाली कहा गया है।

भक्तिमोक्षकृष्ण
श्रीमद्भागवत

कृष्ण को कैसे पाएं?

स्रोत के अनुसार भगवान कृष्ण भक्ति से प्राप्त होते हैं; कलियुग में भक्ति ही सार है।

कृष्णभक्तिभगवान
श्रीमद्भागवत

मोक्ष कैसे मिले?

कलियुग में मोक्ष का मुख्य साधन भक्ति और श्रीमद्भागवत पारायण बताया गया है।

मोक्षभक्तिकलियुग
श्रीमद्भागवत

कलियुग में क्या करें?

कलियुग के लिये कृष्ण-स्मरण, भक्ति और श्रीमद्भागवत पारायण को मुख्य साधन बताया गया है।

कलियुगभक्तिश्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवत

कलियुग में ध्यान योग कठिन क्यों हो गया?

नारदजी बताते हैं कि मन पर नियंत्रण न होना, लोभ, दंभ, पाखंड और शास्त्र-अभ्यास की कमी ध्यानयोग का फल घटाते हैं।

ध्यान योगकलियुगमन
श्रीमद्भागवत

कलियुग में तपस्या का सार क्यों घट गया?

कहा गया है कि काम, क्रोध, लोभ और तृष्णा से चित्त व्याकुल होने पर तप का सार घट जाता है।

कलियुगतपस्यालोभ
श्रीमद्भागवत

कलियुग में तीर्थों का प्रभाव क्यों घटता है?

नारदजी के अनुसार तीर्थों में अधर्म और नास्तिक वृत्ति बढ़ने से उनका सार घट गया।

कलियुगतीर्थधर्म
श्रीमद्भागवत

कलियुग में मन की शांति कैसे मिले?

मन की शांति के लिये श्रीमद्भागवत श्रवण, भक्ति और केशव-कीर्तन का मार्ग दिखाया गया है।

मन की शांतिकलियुगश्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवत

कलियुग में पाप और पाखंड क्यों बढ़ता है?

स्रोत के अनुसार लोभ, असत्य, सदाचार का अभाव, शास्त्र-अभ्यास की कमी और दिखावे से पाप-पाखंड बढ़ता है।

कलियुगपापपाखंड
श्रीमद्भागवत

कलियुग के मुख्य दोष क्या हैं?

असत्य, आलस्य, पाखंड, लोभ, सदाचार का अभाव और साधनों का सार घटना कलियुग के दोष बताए गए हैं।

कलियुगदोषअधर्म
श्रीमद्भागवत

कलियुग में धर्म क्यों घट रहा है?

धर्म-क्षय का कारण सत्य, तप, शौच, दया, दान, साधना और सदाचार का घटना बताया गया है।

कलियुगधर्मअधर्म
श्रीमद्भागवत

क्या हरि कीर्तन से तप और योग का फल मिलता है?

हाँ, कहा गया है कि कलियुग में केशव-कीर्तन से वह फल मिलता है जो तप, योग और समाधि से भी दुर्लभ है।

हरि कीर्तनतपयोग
श्रीमद्भागवत

कलियुग में हरि कीर्तन का क्या महत्व है?

नारदजी कहते हैं कि कलियुग में केशव-कीर्तन से वह फल मिलता है जो तप, योग और समाधि से भी दुर्लभ है।

हरि कीर्तनकलियुगकेशव
श्रीमद्भागवत

कलियुग में भगवान कृष्ण को कैसे प्रसन्न करें?

श्रीमद्भागवत को भगवान कृष्ण की प्रसन्नता और भक्ति-वृद्धि का साधन कहा गया है।

भगवान कृष्णकलियुगभागवत कथा
श्रीमद्भागवत

कलियुग में मोक्ष का सबसे आसान उपाय क्या है?

कलियुग के लिये श्रीमद्भागवत का श्रवण और केशव-कीर्तन मोक्षदायक साधन बताए गए हैं।

कलियुगमोक्षहरि कीर्तन
लोक

श्राद्ध में मांस-मदिरा क्यों वर्जित है?

श्राद्ध में मांस और मदिरा वर्जित हैं; सात्विक भोजन ही उचित है।

मांस मदिराश्राद्ध निषेधकलियुग
स्मृति शास्त्र

पराशर स्मृति किसने रची है?

पराशर स्मृति को कलियुग के धर्म-नियंता महर्षि पराशर ने रचा है। इसमें पितरों के श्राद्ध और सूतक-पातक अशौच के समय शुद्धिकरण के कठोर नियमों का विस्तार से वर्णन है। यह कलियुग के लिए विशेष रूप से रची गई है, और इसमें स्पष्ट तथा व्यावहारिक नियम हैं।

पराशर स्मृतिमहर्षि पराशरकलियुग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

कलियुग में मांस के स्थान पर क्या दिया जाता है?

कलियुग में मांस के स्थान पर केले या अन्य सात्त्विक द्रव्य दिए जाते हैं।

कलियुगमांस के स्थान परकेला
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

शास्त्रों में प्रेत को मांस की आवश्यकता का क्या उल्लेख है?

शास्त्रों में प्रेत के लिए मांस का उल्लेख है, पर कलियुग में उसके स्थान पर केले या सात्त्विक द्रव्य दिए जाते हैं।

प्रेतमांसकलियुग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कलियुग की तुलना किससे की गई बालकाण्ड में?

कालनेमि (कपट की खान) — 'कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू।' कलियुग में राम नाम ही एकमात्र आधार।

बालकाण्डकलियुगकालनेमि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

कलियुग में मुक्ति का एकमात्र उपाय क्या बताया गया है रामचरितमानस में?

कलियुग में राम नाम ही एकमात्र आधार है। तुलसीदासजी ने कहा — 'नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू।' कलियुग में न कर्म है, न भक्ति, न ज्ञान — केवल राम नाम ही उपाय है।

बालकाण्डकलियुगराम नाम
भक्ति एवं आध्यात्म

नाम संकीर्तन का आध्यात्मिक लाभ क्या है

नाम-संकीर्तन के लाभ — चित्त-शुद्धि, पाप-नाश, भक्ति-उदय और मोक्ष। भागवत 12.3.52 के अनुसार यह कलियुग में सतयुग के तप, त्रेता के यज्ञ और द्वापर की पूजा का फल देता है। देश-काल का कोई बंधन नहीं।

नाम संकीर्तनआध्यात्मिक लाभकलियुग
भक्ति एवं आध्यात्म

नवधा भक्ति में कौन सी भक्ति सबसे सरल है

प्रह्लाद के अनुसार श्रवण सर्वश्रेष्ठ है। कलियुग के लिए नाम-संकीर्तन सबसे सुलभ है — देश-काल का कोई बंधन नहीं। जो स्वभाव से सहज लगे वही सबसे सरल भक्ति है।

नवधा भक्तिश्रवणसरल भक्ति

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।