ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

ध्यान प्रश्नोत्तरी — 203 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित ध्यान विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 203 प्रश्न

ध्यान साधना

ध्यान और योग में क्या अंतर है?

शास्त्रीय: योग=सम्पूर्ण 8 अंग, ध्यान=7वाँ अंग। योगसूत्र: ध्यान=एक विषय पर निरंतर प्रवाह। आधुनिक: योग=आसन/शारीरिक, ध्यान=मानसिक। सम्बंध: आसन→प्राणायाम→प्रत्याहार→धारणा→ध्यान→समाधि। ध्यान=योग का हृदय। दोनों परस्पर पूरक।

ध्यानयोगअष्टांग योग
शिव ध्यान

शिव ध्यान में आज्ञा चक्र पर ध्यान क्यों लगाते हैं?

शिव का तीसरा नेत्र = आज्ञा चक्र। इड़ा+पिंगला = सुषुम्ना मिलन (अद्वैत = शिव)। बीज मंत्र 'ॐ' = शिव मंत्र। सहस्रार (शिव) का प्रवेश द्वार। मन शांत = शिव अवस्था।

आज्ञा चक्रतीसरा नेत्रकारण
अघोर दर्शन

अघोर शिव ने ब्रह्मा को दर्शन कैसे दिया?

ब्रह्मा ने ध्यान और शरणागति से अघोर को ब्रह्मस्वरूप मानकर ध्यान किया, तब अघोर महादेव ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिया।

अघोर दर्शनब्रह्माध्यान
अघोर उपासना

प्राणायाम और ध्यान से शिव की उपासना कैसे बताई गई है?

ध्यानयुक्त मन, प्राणायाम और हृदय में महेश्वर को धारण करके अघोररूप परमेश्वर की शरण लेना उपासना रूप में बताया गया है।

प्राणायामध्यानउपासना
ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा ने अघोर शिव की शरण कैसे ली?

ब्रह्मा ने अघोर शिव को महादेव जानकर प्रणाम किया, प्राणायाम और ध्यान से महेश्वर को हृदय में धारण किया और उनकी शरण ली।

ब्रह्माअघोरशरणागति
ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा का वर्ण काला कैसे हुआ?

प्रजासृष्टि की इच्छा से चिंतनमग्न और पुत्रकामना से ध्यानरत होने पर ब्रह्मा का वर्ण काला बताया गया है।

ब्रह्माकृष्णवर्णध्यान
ब्रह्मा और अघोर

ब्रह्मा ने प्रजा-सृष्टि के लिए क्या किया?

ब्रह्मा प्रजासृष्टि की इच्छा से दुःखित होकर विचारमग्न हुए और पुत्र की कामना से ध्यान करने लगे।

ब्रह्माप्रजासृष्टिचिंतन
तत्पुरुष फल

पुनर्जन्म के बंधन से कैसे छूटा जा सकता है?

नियतात्मा, ध्यानपरायण और जितेन्द्रिय होकर महेश्वर की शरण लेने से साधक पुनर्भव के बंधन से छूटता है।

पुनर्जन्मपुनर्भवमुक्ति
तत्पुरुष फल

ध्यान और इन्द्रिय संयम से पाप कैसे दूर होते हैं?

नियतात्मा, ध्यानपरायण और जितेन्द्रिय होकर महेश्वर की शरण लेने से सभी पाप दूर होते हैं।

ध्यानइन्द्रिय संयमजितेन्द्रिय
रौद्री गायत्री

रौद्री गायत्री को ज्ञानदायिनी और विद्यास्वरूपिणी क्यों कहा गया है?

रौद्री गायत्री को वेदप्रतिपादित, ज्ञानदायिनी, विद्यास्वरूपिणी और लोकवन्द्या महादेवी कहा गया है।

रौद्री गायत्रीज्ञानदायिनीविद्यास्वरूपिणी
ब्रह्मा और वामदेव

ब्रह्मा को ध्यान में लाल कुमार के रूप में कौन दिखाई दिए?

ब्रह्मा को ध्यान में लाल कुमार के रूप में वामदेव शिव दिखाई दिए, जिन्हें उन्होंने साक्षात् देवेश्वर जाना।

ब्रह्माध्यानलाल कुमार
श्रद्धा और शिवदर्शन

शिवलिंग में ध्यान क्यों बताया गया है?

क्योंकि शिव ने स्वयं कहा कि ब्रह्मा और विष्णु द्वारा देखे गए लिंग में ही सबको उनका ध्यान करना चाहिए।

शिवलिंगध्यानश्रद्धा
ब्रह्मा और शिव संवाद

ब्रह्मा ने शिव से क्या पूछा था?

ब्रह्मा ने पूछा कि शिव किस प्रकार वश में होते हैं और उनका ध्यान कहाँ करना चाहिए।

ब्रह्माशिवमहादेव
शिवभक्ति

शिवभक्ति पाने के साधन कौन-कौन से हैं?

ज्ञान, अध्यापन, होम, ध्यान, यज्ञ, तप, वेद, दान और अध्ययन शिवभक्ति प्राप्त करने के साधन बताए गए हैं।

शिवभक्तिज्ञानअध्यापन
कुम्भक और ऐक्य

धारणा, ध्यान और समाधि की गणना कैसे बताई गई है?

बारह प्राणायामों की एक धारणा, बारह धारणाओं का एक ध्यान और बारह ध्यानों की एक समाधि कही गई है।

धारणाध्यानसमाधि
योग अभ्यास

योगी को पाप, विषय और काम-क्रोध कैसे दूर करने चाहिए?

योगी को प्राणायाम से दोष, धारणा से पाप, प्रत्याहार से विषय, ध्यान से अनीश्वर गुण और समाधि से बुद्धि की वृद्धि करनी चाहिए।

योगीपाप दहनप्रत्याहार
प्रत्याहार और ध्यान

ध्यान और समाधि में क्या अंतर है?

ध्येय विषय में चित्त की एकाग्रता ध्यान है; ध्येयमात्र से प्रकाशित देहशून्य स्थिति समाधि है।

ध्यानसमाधिचित्त एकाग्रता
अष्टांग योग

अष्टांग योग क्या होता है?

अष्टांग योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।

अष्टांग योगयमनियम
श्रीमद्भागवत

भगवान को प्रसन्न कैसे करें?

अपने धर्म की पूर्ण सिद्धि भगवान को प्रसन्न करने में है; इसलिए एकाग्र मन से उनका श्रवण, कीर्तन, ध्यान और पूजन करना चाहिए।

भगवान को प्रसन्नश्रवणकीर्तन
लोक

ब्रह्मा जी की तपस्या कैसी थी?

वह इंद्रिय-निग्रह और गहन ध्यान की तपस्या थी।

तपस्याब्रह्माध्यान
लोक

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय श्रीहरि का ध्यान क्यों करना चाहिए?

मृत्यु के समय मोह-माया त्यागकर श्रीहरि का ध्यान करने की बात गरुड़ पुराण में कही गई है।

गरुड़ पुराणमृत्युश्रीहरि
लोक

तपोलोक में रहने वाले जीव ध्यान और समाधि का आहार कैसे करते हैं?

तपोलोक के जीव ध्यान, समाधि और ईश्वर के सामीप्य को ही अपना जीवन-स्रोत मानते हैं।

तपोलोकध्यानसमाधि
लोक

सत्यलोक के निवासी भोजन क्यों नहीं करते?

सत्यलोक के निवासी विशुद्ध सत्वगुणी और चिन्मय शरीर के कारण भौतिक अन्न से नहीं बल्कि ध्यान, ज्ञान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा से पोषण पाते हैं।

सत्यलोकभोजनध्यान
षोडशोपचार पूजा

मकर संक्रांति पर आदित्यहृदय स्तोत्र क्यों पढ़ते हैं?

आदित्यहृदय स्तोत्र/सूर्याष्टक/सूर्य सहस्रनाम = पूजा के ध्यान चरण में पाठ। कारण: सूर्य = प्रत्यक्ष देवता, 'ब्रह्म' का दृष्टिगोचर स्वरूप (असावादित्यो ब्रह्मा)। ये स्तोत्र इस प्रत्यक्ष देव की स्तुति का सर्वश्रेष्ठ माध्यम हैं।

आदित्यहृदय स्तोत्रसूर्याष्टकसूर्य सहस्रनाम

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।