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बालकाण्ड प्रश्नोत्तरी — 321 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित बालकाण्ड विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 321 प्रश्न

रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीता-राम विवाह तय होने पर राजा जनक ने किसे दूत बनाकर भेजा?

विशिष्ट नाम मानस में नहीं — जनक ने विश्वामित्रजी की सलाह पर दूत भेजे। दूतों ने दशरथ को सब समाचार सुनाये — धनुष भंग, जयमाला, बारात का निमन्त्रण। दशरथ प्रसन्न हुए, बारात की तैयारी शुरू।

बालकाण्डदूतजनक
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी' — इसका अर्थ?

अर्थ — रामजी के विवाह की जो विधि बताई, उसी रीति से सब राजकुमार (भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न) भी विवाहे गये। चारों विवाह एक ही वेदविधि, एक मण्डप, एक अवसर पर। दहेज से मण्डप सोने-मणियों से भरा।

बालकाण्डचौपाई अर्थचारों विवाह
रामचरितमानस — बालकाण्ड

राजा जनक और राजा दशरथ का मिलन कैसा था?

अत्यन्त प्रेमपूर्ण — जनक ने भव्य स्वागत किया, प्रेम से गले लगे। 'इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि' — पवित्र प्रीति वाणी से कही नहीं जा सकती। जनक ने कहा — ब्रह्म-जीव जैसा स्वाभाविक प्रेम।

बालकाण्डजनक दशरथ मिलनप्रेम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

बारात अयोध्या से कब और कैसे चली?

गुरु वसिष्ठजी की आज्ञा पर शुभ मुहूर्त में — 'सजहु बारात बजाइ निसाना।' हाथी-घोड़े-रथ सजाये, ब्राह्मण-मुनि-सेना साथ लिये। भव्य बारात अयोध्या से जनकपुर चली।

बालकाण्डबारात प्रस्थानअयोध्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने जाते समय क्या कहा?

पुलकित-प्रफुल्लित होकर स्तुति — 'जय रघुबंस बनज बन भानू।' वैष्णव धनुष रामजी को दिया, प्रणाम किया और प्रसन्नतापूर्वक तपोवन चले गये। सभा में आनन्द छा गया।

बालकाण्डपरशुराम विदाराम स्तुति
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी और लक्ष्मणजी के संवाद में विश्वामित्रजी ने क्या भूमिका निभाई?

विश्वामित्रजी ने बीच-बचाव किया। रामजी ने इशारे से लक्ष्मण को शान्त कर पास बैठाया। फिर रामजी ने स्वयं मृदु-विनीत वाणी से परशुरामजी से बात करके शान्ति स्थापित की — मर्यादा पुरुषोत्तम का आदर्श।

बालकाण्डविश्वामित्रमध्यस्थता
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं' — किसने कहा?

लक्ष्मणजी ने परशुरामजी से कहा — बचपन में बहुत धनुष तोड़े, कभी ऐसा क्रोध नहीं हुआ। प्रसिद्ध व्यंग्य — शिवजी के दिव्य धनुष को 'धनुही' (साधारण छोटा धनुष) कहा।

बालकाण्डलक्ष्मणपरशुराम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने अपना वैष्णव धनुष किसे दिया?

श्रीरामजी को — 'राम रमापति कर धनु लेहू। खेंचहु मिटै मोर संदेहू।' धनुष देने लगे तो वह स्वयं रामजी के पास चला गया — इससे परशुरामजी को निश्चय हुआ कि ये साक्षात् विष्णु हैं।

बालकाण्डवैष्णव धनुषपरशुराम
रामचरितमानस — बालकाण्ड

परशुरामजी ने किन-किन क्षत्रियों/राजाओं को पहले मारा था?

इक्कीस बार पृथ्वी क्षत्रियविहीन की। सहस्रबाहु (हज़ार भुजाओं वाला) को भी मारा। पिता जमदग्नि की हत्या का प्रतिशोध। 'बिस्व बिदित छत्रिय कुल द्रोही' — संसार जानता है मैं क्षत्रिय कुल का शत्रु हूँ।

बालकाण्डपरशुरामइक्कीस बार
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'भरे भुवन घोर कठोर रव रबि बाजि तजि मारगु चले' — इसका अर्थ?

अर्थ — भयंकर कठोर ध्वनि से सब लोक भरे, सूर्य के घोड़े मार्ग छोड़ भटके, दिग्गज चिंघाड़े, पृथ्वी डोली, शेष-वाराह-कच्छप कलमलाये। धनुष भंग की ध्वनि से सारी सृष्टि काँप उठी।

बालकाण्डछन्द अर्थधनुष भंग ध्वनि
रामचरितमानस — बालकाण्ड

'कोदंड खण्डेउ राम तुलसी जयति बचन उचारहीं' — इसका अर्थ?

अर्थ — तुलसीदासजी कहते हैं — जब सबको निश्चय हुआ कि रामजी ने कोदण्ड (शिवजी का धनुष) तोड़ डाला, तब सब 'जयति' (जय हो) बोलने लगे। धनुष भंग के क्षण की जयकार।

बालकाण्डछन्द अर्थधनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विश्वामित्रजी ने श्रीरामजी से धनुष तोड़ने के लिये क्या कहा?

'उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा' — उठो राम, शिवजी का धनुष तोड़ो, जनक का सन्ताप मिटाओ। गुरु की आज्ञा पर रामजी उठे और सहज भाव से धनुष तोड़ दिया।

बालकाण्डविश्वामित्र आज्ञाधनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

लक्ष्मणजी ने पृथ्वी को वीरविहीन कहने पर क्या प्रतिक्रिया दी?

लक्ष्मणजी ने क्रोध से कहा — ब्रह्माण्ड गेंद-सा उठा लूँ, मेरु मूली-सा तोड़ दूँ, यह धनुष तो क्या! वचन बोलते ही पृथ्वी डगमगाई, दिग्गज काँपे। सब डरे, सीता हर्षित, जनक सकुचाये।

बालकाण्डलक्ष्मणवीरविहीन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

बालकाण्ड में कुल कितने दोहे/छन्द हैं?

बालकाण्ड सबसे बड़ा काण्ड — लगभग 361 दोहे + सैकड़ों चौपाइयाँ-छन्द-सोरठे। पृष्ठ 17-340 (गीता प्रेस)। मंगलाचरण से लेकर सीता-राम विवाह और अयोध्या वापसी तक। रामचरितमानस का सबसे विस्तृत काण्ड।

बालकाण्डदोहा संख्याछन्द
रामचरितमानस — बालकाण्ड

बालकाण्ड का अन्तिम सन्देश क्या है?

रामचरित की अपार महिमा — जो इस कथा को कहे-गाये वे सदा सुख पावें। 'चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु' — शिवजी का चरित्र समुद्र-सा अपार, वेद भी पार न पायें। सन्देश — विनम्रता, भक्ति और रामचरित महिमा।

बालकाण्डअन्तिम सन्देशरामचरित महिमा
रामचरितमानस — बालकाण्ड

अयोध्या वापसी पर नगरवासियों ने कैसे स्वागत किया?

अपार आनन्द — नगर सजा, तोरण-पताकाएँ, मंगलगान। 'नगर नारि नर रूप निहारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी' — बहुओं का रूप देख नेत्र-फल पाकर सुखी। ब्राह्मणों को दान, गरीबों को भोजन, अयोध्या उत्सवमय।

बालकाण्डअयोध्या वापसीस्वागत
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विवाह में जनक ने कितना दहेज दिया?

अपार दहेज — दासी, दास, घोड़े, रथ, हाथी, गायें, वस्त्र, मणि, सोने के बर्तन, कम्बल, पटोरे — 'दाइज दीन्ह न जाइ बखाना' — जिसका वर्णन नहीं हो सकता।

बालकाण्डदहेजजनक
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विवाह के समय कौन-कौन से वाद्ययन्त्र बजे?

अनेक प्रकार के — 'बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना' — आकाश में देवताओं के नगाड़े, अप्सराओं का नृत्य-गान, किन्नरों के गीत। पृथ्वी पर शहनाई, ढोल, मंगलवाद्य। 'सकल भुवन भरि रहा उछाहू' — सारे ब्रह्माण्ड में आनन्द।

बालकाण्डवाद्यविवाह
रामचरितमानस — बालकाण्ड

सीता-राम विवाह में कन्यादान किसने किया?

राजा जनक ने — 'गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी' — कुश हाथ में लेकर कन्या का हाथ पकड़कर भवानी (सीता) को भव (राम) को समर्पित किया। सीता-राम को शिव-पार्वती समान माना।

बालकाण्डकन्यादानजनक
रामचरितमानस — बालकाण्ड

विवाह के बाद बारात अयोध्या कब और कैसे लौटी?

विवाह-दहेज-विदाई के बाद भव्यता से अयोध्या लौटी। जनक ने अपार दहेज दिया। अयोध्या में अपार आनन्द — नगरवासी बहुओं का रूप देखकर सुखी हुए। बालकाण्ड का अन्तिम भाग — रामचरित महिमा।

बालकाण्डबारात वापसीअयोध्या
रामचरितमानस — बालकाण्ड

शत्रुघ्नजी की पत्नी का क्या नाम था?

श्रुतकीर्ति — कुशध्वज (जनक के भाई) की पुत्री। सुन्दर नेत्रवाली, सुमुखी, सब गुणों की खान, रूप और शील में उजागर।

बालकाण्डश्रुतकीर्तिशत्रुघ्न पत्नी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

भरतजी की पत्नी का क्या नाम था?

माण्डवी — राजा जनक के छोटे भाई कुशध्वज की पुत्री। चारों विवाह एक ही विधि से हुए। दशरथ सब पुत्रों को बहुओं सहित देखकर ऐसे आनन्दित हुए मानो चारों पुरुषार्थ पा लिये।

बालकाण्डमाण्डवीभरत पत्नी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

लक्ष्मणजी की पत्नी का क्या नाम था?

उर्मिला — सीताजी की छोटी बहन, जनकजी की पुत्री। सुन्दरियों में शिरोमणि। जब लक्ष्मणजी वनवास गये तो उर्मिला ने 14 वर्ष अयोध्या में तपस्विनी का जीवन व्यतीत किया।

बालकाण्डउर्मिलालक्ष्मण पत्नी
रामचरितमानस — बालकाण्ड

चारों भाइयों का विवाह किन-किन से हुआ?

राम — सीता, लक्ष्मण — उर्मिला (सीता की छोटी बहन), भरत — माण्डवी (कुशध्वज की पुत्री), शत्रुघ्न — श्रुतकीर्ति (कुशध्वज की पुत्री)। चारों विवाह एक ही मण्डप में वेदविधि से सम्पन्न हुए।

बालकाण्डचारों विवाहउर्मिला

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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