ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
वार

गुरुवार वार — वार — व्रत, देव-पूजन, मंत्र प्रश्नोत्तर(158)

गुरुवार वार से जुड़े 158 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

तंत्र शास्त्र

बिना गुरु के तांत्रिक साधना करने के क्या खतरे हैं?

खतरे: मानसिक अस्थिरता, शारीरिक कष्ट, नकारात्मक शक्तियां, मंत्र दोष, अहंकार। कुलार्णव: 'गुरु बिना = करोड़ कल्प में सिद्धि नहीं।' इंटरनेट/पुस्तक से = अत्यंत खतरनाक। सुरक्षित: राम नाम/गायत्री/चालीसा — तांत्रिक = केवल सिद्ध गुरु।

#खतरे#बिना गुरु#तंत्र
दिव्यास्त्र

श्रीराम को वायव्यास्त्र कैसे मिला?

श्रीराम को वायव्यास्त्र उनके गुरु महर्षि विश्वामित्र ने दिया था जब वे यज्ञ रक्षा के लिए उन्हें वन ले गए थे।

#श्रीराम#वायव्यास्त्र#विश्वामित्र
ग्रह उपाय

गुरु ग्रह मजबूत करने के गुरुवार उपाय?

विष्णु-लक्ष्मी पूजा, केला वृक्ष पूजा, 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 108, हल्दी/चना/पीला/पुस्तक दान, गुरुवार व्रत, पुखराज(ज्योतिषी), पीले वस्त्र। ज्ञान बांटें+दान=गुरु प्रसन्न।

#गुरु#बृहस्पति#गुरुवार
आधुनिक धर्म

ऑनलाइन गुरु से दीक्षा लेना सही है क्या?

आदर्श नहीं, पर विकल्प। दीक्षा=व्यक्तिगत(ऊर्जा/स्पर्श=ऑनलाइन असंभव)। ऑनलाइन शिक्षा/मार्गदर्शन=स्वीकार्य। ⚠️ नकली/ठगी खतरा। औपचारिक दीक्षा=सशरीर। धीरज रखें।

#ऑनलाइन#गुरु#दीक्षा
तंत्र शास्त्र

तंत्र में गुरु सेवा का क्या महत्व है?

गुरु गीता: 'गुरुसेवा = सबसे बड़ा तप।' कृपा प्राप्ति (सेवा→कृपा→सिद्धि), अहंकार नाश, ज्ञान (सान्निध्य), कर्म शुद्धि, शक्ति संचार। सेवा: शारीरिक (आश्रम), वाचिक (प्रचार), मानसिक (आज्ञा), आर्थिक (दान)। एकलव्य, हनुमान = आदर्श।

#गुरु सेवा#सेवा#शिष्य
तंत्र शास्त्र

तंत्र में गुरु परंपरा का क्या महत्व है?

गुरु परंपरा = तंत्र रीढ़। शक्ति: गुरु→शिष्य अखंड श्रृंखला। शुद्ध ज्ञान (मुखतः), सुरक्षा, पात्रता परीक्षण। कुलार्णव: शिव→शक्ति→गुरु→शिष्य। आगम-कल्पद्रुम: माता दीक्षा = 8 गुना फलदायी।

#गुरु परंपरा#शिष्य#परम्परा
तंत्र शास्त्र

तांत्रिक साधना में गुरु का होना क्यों अनिवार्य है?

कुलार्णव: 'गुरु बिना मंत्र नहीं।' कारण: मंत्र चैतन्य (गुरु जागृत करें), सूक्ष्म विधि (भूल=गंभीर), शक्ति हस्तांतरण (परंपरा), सुरक्षा कवच (उग्र शक्तियां), अनुभव (ग्रंथ≠अनुभव)। गुरु गीता: 'गु=अंधकार, रु=प्रकाश।'

#गुरु#अनिवार्य#तंत्र
आध्यात्मिक साधना

आध्यात्मिक अनुभवों को दूसरों से साझा करना चाहिए या नहीं?

सामान्य: गोपनीय रखें। कारण: अहंकार↑, शक्ति क्षय (बीज खोलें=सूखे), उपहास/ईर्ष्या। किसे बताएँ: गुरु=अवश्य, सहसाधक=सीमित, परिवार=सावधानी। अपवाद: गुरु कहें, दूसरों को मार्गदर्शन (विनम्रता से)। कबीर: 'बोलना कहाँ बुद्धिमानी, बोले वहाँ हानि।'

#अनुभव गोपनीयता#साझा करना#गुरु
पूजा विधि एवं कर्मकांड

हल्दी तिलक कब लगाना शुभ है

हल्दी तिलक गुरुवार को, मांगलिक कार्यों के आरंभ में, गणेश-लक्ष्मी पूजन में और विवाह-संस्कार में विशेष रूप से शुभ है। यह बृहस्पति ग्रह को बल देता है और मंगलाचरण का प्रतीक है।

#हल्दी तिलक#शुभ अवसर#हल्दी धार्मिक उपयोग
गुरु परंपरा

सच्चे गुरु की पहचान शास्त्रों के अनुसार?

मुंडकोपनिषद: श्रोत्रिय(शास्त्रज्ञ)+ब्रह्मनिष्ठ(अनुभवी)। गीता: तत्त्वदर्शी। विवेकचूड़ामणि: शास्त्रज्ञ+ब्रह्मनिष्ठ+करुणामय+निष्काम। निर्लोभ, सदाचारी, जितेन्द्रिय, स्वतंत्रता दे।

#सच्चा गुरु#पहचान#शास्त्र
वार शास्त्र

गुरुवार को कौन से काम शुभ?

गुरुवार=बृहस्पति(ज्ञान/धन)। सबसे शुभ — विवाह, गृहप्रवेश, शिक्षा, पूजा, सोना खरीद, दान। सत्यनारायण कथा। कोई वर्जना नहीं।

#गुरुवार#शुभ#बृहस्पति
दिव्यास्त्र

श्रीराम को आग्नेयास्त्र कैसे मिला?

श्रीराम को आग्नेयास्त्र उनके गुरु महर्षि विश्वामित्र से मिला था जो उन्हें राक्षसों से यज्ञ की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए दिया गया था।

#श्रीराम#आग्नेयास्त्र#विश्वामित्र
मंत्र जप ज्ञान

मंत्र जप में पुस्तक से सीखकर जप करना उचित है या गुरु से सीखें?

गुरु > पुस्तक (शक्ति transfer, उच्चारण, मार्गदर्शन)। किन्तु: 'ॐ नमः शिवाय'/गायत्री = दीक्षा अनिवार्य नहीं। बीज/तांत्रिक = गुरु अनिवार्य। 'गुरु न मिले = शुरू करें — ईश्वर = गुरु।'

#पुस्तक#गुरु#सीखना
शिव रूप

दक्षिणामूर्ति शिव की उपासना का क्या महत्व है?

दक्षिणामूर्ति = शिव का परम गुरु स्वरूप। दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (यजुर्वेद): 24 अक्षर मंत्र। शंकराचार्य स्तोत्र: अद्वैत सार, 'मोक्ष शास्त्र'। मौन गुरु — वृद्ध शिष्यों के संशय छिन्न। गुरु न मिले तो इन्हें गुरु मानें। गुरुवार/गुरु पूर्णिमा विशेष। विद्यार्थियों के लिए बुद्धि वृद्धि।

#दक्षिणामूर्ति#गुरु#ज्ञान
मंत्र विधि

मंत्र जप में गुरु का मार्गदर्शन कैसे लें?

गुरु = सबसे महत्वपूर्ण। पहचान: शास्त्र+अनुभव, निःस्वार्थ, परंपरा, शुद्ध आचरण। कैसे: दीक्षा, नियमित संपर्क, प्रश्न, आज्ञा पालन, सेवा। न मिले: सद्ग्रंथ=गुरु, नाम जप, ईश्वर से प्रार्थना।

#गुरु#मार्गदर्शन#शिष्य
गुरु परंपरा

आधुनिक युग में गुरु कैसे ढूंढें?

गीता(4.34): ज्ञानियों के पास जाओ, प्रणाम+प्रश्न+सेवा करो। शास्त्र पहले पढ़ें, सत्संग जाएँ, कई गुरु सुनें, शास्त्र+आचरण परखें। 'शिष्य तैयार=गुरु मिलते हैं।'

#गुरु#ढूंढना#आधुनिक
मंत्र जप ज्ञान

गुरु मंत्र और इष्ट मंत्र में क्या अंतर होता है?

गुरु मंत्र: दीक्षा में प्राप्त, अत्यंत गोपनीय, गुरु+मंत्र शक्ति, मोक्ष। इष्ट: स्वयं चुना/गुरु निर्धारित, कम गोपनीय, कामना+भक्ति। गुरु मंत्र > इष्ट (शक्ति)।

#गुरु मंत्र#इष्ट मंत्र#अंतर
दिव्यास्त्र

दिव्यास्त्र प्राप्त करने के क्या तरीके थे?

दिव्यास्त्र तीन तरीकों से मिलते थे — देवताओं की कठोर तपस्या, देवताओं से सीधा वरदान, या द्रोणाचार्य जैसे गुरु से शिक्षा।

#दिव्यास्त्र#प्राप्ति#तपस्या
मंत्र साधना

बिना गुरु दीक्षा के मंत्र साधना

भगवान का 'नाम जप' बिना गुरु दीक्षा के किया जा सकता है। परंतु बीज मंत्रों और तांत्रिक साधनाओं के लिए ऊर्जा को संतुलित रखने हेतु गुरु दीक्षा अनिवार्य है।

#गुरु दीक्षा#नाम जप#बीज मंत्र
दशमहाविद्या

दस महाविद्या साधना बिना गुरु दीक्षा के कर सकते हैं या नहीं?

गहन तांत्रिक = गुरु अनिवार्य। स्तोत्र/सामान्य पूजा = बिना दीक्षा संभव। उग्र (काली/बगलामुखी/छिन्नमस्ता) = खतरनाक बिना गुरु। सौम्य (भुवनेश्वरी/कमला) = सरल। शुरुआत: सौम्य → उग्र।

#गुरु दीक्षा#साधना#नियम
धार्मिक उपाय

गुरुवार को केले का दान क्यों करते हैं?

गुरुवार = बृहस्पति (गुरु) दिन। केला = पीला (गुरु का रंग) + विष्णु/बृहस्पति प्रतीक। विधि: पीले केले + 'ॐ बृहस्पतये नमः' + दान। लाभ: ज्ञान, सम्मान, संतान सुख, विवाह बाधा दूर।

#गुरुवार#केला दान#गुरु ग्रह
अस्त्र शस्त्र

गुरु द्रोण ने किन-किन को दिव्यास्त्र दिए थे?

द्रोण ने अर्जुन को ब्रह्मास्त्र + ब्रह्मशिरास्त्र (संहार सहित), अश्वत्थामा को ब्रह्मास्त्र + ब्रह्मशिरास्त्र + नारायणास्त्र (संहार विधि बिना), युधिष्ठिर को ब्रह्मास्त्र दिया।

#द्रोण शिष्य#अर्जुन#अश्वत्थामा
गुरु भक्ति

दत्तात्रेय मंत्र का जप गुरु कृपा के लिए कैसे करें?

दत्तात्रेय = त्रिमूर्ति अवतार, आदि गुरु। 'ॐ दत्तात्रेयाय नमः' 108। गुरुवार, दत्त जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)। रुद्राक्ष, औदुंबर (गूलर) वृक्ष नीचे। 24 गुरु (प्रकृति)। गुरु कृपा/ज्ञान/मार्गदर्शन। महाराष्ट्र/कर्नाटक प्रचलित।

#दत्तात्रेय#गुरु#त्रिमूर्ति
तंत्र साधना

तंत्र में शक्तिपात के समय क्या अनुभव होता है?

गुरु → शिष्य ऊर्जा transfer। कंपन/गर्मी-ठंडक/विद्युत, रोना/हंसना/आनंद, प्रकाश/देवता दर्शन, नाद, शून्यता। स्पर्श/दृष्टि/मंत्र से। काश्मीर शैव: तीव्र/मध्यम/मंद। अनुभव व्यक्तिगत।

#शक्तिपात#अनुभव#गुरु
तंत्र शास्त्र

तंत्र विद्या सीखने के लिए कहाँ जाएं?

गुरु से ही — इंटरनेट/पुस्तक नहीं। कहाँ: सिद्ध गुरु (सर्वोत्तम), शाक्त मठ (कामाख्या/तारापीठ/काशी), संस्कृत विश्वविद्यालय। सावधानी: 90% ठग, धन मांगने वाले=संदेहास्पद, YouTube तांत्रिक=खतरनाक। पहले भक्ति दृढ़ करें → गुरु स्वयं मिलेगा।

#सीखना#कहाँ#गुरु
लोक

धर्म, वेद और गुरु की निंदा पिशाच योनि का कारण क्यों है?

धर्म, वेद, गुरु और देवताओं की निंदा जीव को तामसिक और पाखंडी बनाती है, इसलिए पिशाच योनि मिलती है।

#धर्म निंदा#वेद निंदा#गुरु निंदा
नियम और सावधानियाँ

श्री विद्या साधना में गुरु दीक्षा क्यों अनिवार्य है?

श्री विद्या में गुरु दीक्षा अनिवार्य क्यों: मंत्र का अर्थ + प्रत्येक अक्षर की शक्ति + साधना के क्रम (सृष्टि-स्थिति-संहार) = गुरु से ही समझना जरूरी। पञ्चदशी मंत्र = अत्यंत गोपनीय — केवल योग्य गुरु से दीक्षा द्वारा।

#गुरु दीक्षा#गुरु परंपरा#मंत्र अर्थ
गुरु शिष्य परंपरा परिचय

शास्त्रों ने गुरु का स्थान ईश्वर से ऊपर क्यों माना है?

शास्त्र गुरु को ईश्वर से ऊपर इसलिए मानते हैं क्योंकि ईश्वर का साक्षात्कार कराने वाले पथ-प्रदर्शक स्वयं गुरु ही होते हैं — वे अज्ञान-अंधकार नष्ट कर शिवत्व में विलीन होने का मार्ग देते हैं।

#गुरु ईश्वर से ऊपर#साक्षात्कार#पथ प्रदर्शक
गुरु शिष्य परंपरा परिचय

शास्त्रों में गुरु को क्या माना गया है?

शास्त्र गुरु को साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समतुल्य मानता है — गुरु अज्ञान का नाश कर ज्ञान का प्रकाश देते हैं, आध्यात्मिक संभावनाओं की रक्षा करते हैं और ईश्वर का साक्षात्कार कराने वाले पथ-प्रदर्शक हैं।

#गुरु महत्व#ब्रह्मा विष्णु महेश#अज्ञान नाश
गुरु शिष्य परंपरा परिचय

गुरु-शिष्य परंपरा क्या है?

गुरु-शिष्य परंपरा सनातन धर्म की वह जीवंत, पवित्र और शाश्वत व्यवस्था है जो आध्यात्मिक प्रज्ञा को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक अक्षुण्ण रूप में पहुंचाती है — गुरु शिष्य के अज्ञान का नाश कर उसे शिवत्व में विलीन होने का मार्ग देते हैं।

#गुरु शिष्य परंपरा#आध्यात्मिक प्रज्ञा#शाश्वत सोपान
सुमेरु और ब्रह्म ग्रंथि

सुमेरु को 'गुरु मनका' क्यों कहते हैं?

सुमेरु को 'गुरु मनका' इसलिए कहते हैं क्योंकि यह साक्षात गुरु-तत्व, परब्रह्म और साधक के आध्यात्मिक लक्ष्य का प्रतिनिधित्व करता है — सुमेरु पर्वत की भांति यह सर्वोच्च शिखर का प्रतीक है।

#गुरु मनका#सुमेरु#गुरु तत्व
तंत्र और आगम शास्त्रों में उपासना

गुरु (बृहस्पति) का बीज मंत्र और गायत्री मंत्र क्या है?

गुरु बीज मंत्र: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' | गुरु गायत्री: 'ॐ वृषभध्वजाय विद्महे, कृणिहस्ताय धीमहि, तन्नो गुरुः प्रचोदयात्'

#गुरु बीज मंत्र#बृहस्पति गायत्री#वृषभध्वजाय
गुरु तत्व और गुरु कृपा

बिना गुरु के तंत्र साधना करने से क्या होता है?

बिना गुरु के तंत्र साधना असंभव और आत्मघाती है — गुरु के बिना मंत्र केवल शब्द मात्र रहते हैं और साधना प्राणहीन क्रिया बन जाती है।

#बिना गुरु#आत्मघाती#प्राणहीन
गुरु तत्व और गुरु कृपा

शक्तिपात क्या होता है?

शक्तिपात गुरु की कृपा का वह रूप है जो शिष्य में संचारित होकर सोई कुंडलिनी जाग्रत करती है और साधना के विघ्नों से रक्षा करती है — मोक्ष केवल इसी गुरु-कृपा से संभव है।

#शक्तिपात#गुरु कृपा#कुंडलिनी जागरण
गुरु तत्व और गुरु कृपा

'ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः' श्लोक का क्या अर्थ है?

'ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः...' का अर्थ: ध्यान का मूल = गुरु की मूर्ति; पूजा का मूल = गुरु के चरण; मंत्र का मूल = गुरु का वाक्य; मोक्ष का मूल = केवल गुरु की कृपा।

#ध्यानमूलं#गुरु गीता#मोक्ष मूल
गुरु तत्व और गुरु कृपा

सद्गुरु में कौन से दो गुण होने चाहिए?

सद्गुरु में दो गुण अनिवार्य हैं: (1) श्रोत्रिय — शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान, (2) ब्रह्मनिष्ठ — ब्रह्म का अपरोक्ष (साक्षात्) अनुभव।

#सद्गुरु गुण#श्रोत्रिय#ब्रह्मनिष्ठ
गुरु तत्व और गुरु कृपा

'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः' श्लोक का क्या अर्थ है?

'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' का अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश्वर हैं, गुरु ही साक्षात् परब्रह्म हैं — ऐसे श्रीगुरु को नमन।

#गुरुर्ब्रह्मा#ब्रह्मा विष्णु महेश#परब्रह्म
गुरु तत्व और गुरु कृपा

गुरु गीता में गुरु के बारे में क्या कहा गया है?

गुरु गीता (स्कंद पुराण): 'गुरुर्ब्रह्मागुरुर्विष्णुःगुरुर्देवोमहेश्वरः। गुरुःसाक्षात्परब्रह्म...' — गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश और साक्षात परब्रह्म हैं।

#गुरु गीता#स्कंद पुराण#गुरुर्ब्रह्मा
गुरु तत्व और गुरु कृपा

'गुरु' शब्द का क्या अर्थ है?

'गुरु' शब्द का अर्थ: 'गु' = अज्ञान रूपी अंधकार, 'रु' = ज्ञान रूपी प्रकाश — गुरु वह सार्वभौमिक तत्त्व है जो अज्ञान के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से नष्ट करता है।

#गुरु शब्द अर्थ#गु रु#अज्ञान नाश
गुरु तत्व और गुरु कृपा

तंत्र मार्ग में गुरु कौन होते हैं?

तंत्र मार्ग में गुरु केवल शिक्षक नहीं बल्कि साक्षात शिव-स्वरूप और एक सार्वभौमिक तत्त्व हैं — 'गु' = अज्ञान अंधकार, 'रु' = ज्ञान प्रकाश से नष्ट करने वाले।

#तंत्र गुरु#शिव स्वरूप#गुरु तत्व
षडाक्षर मंत्र और गुरु दीक्षा

गुरु दीक्षा का नमः शिवाय साधना में क्या महत्व है?

गुरु अपनी तपस्या की शक्ति से मंत्र को चैतन्य करके शिष्य को देते हैं — इससे साधक का मार्ग सुगम और शीघ्र फलदायी हो जाता है।

#गुरु दीक्षा महत्व#मंत्र चैतन्य#तपस्या शक्ति
षडाक्षर मंत्र और गुरु दीक्षा

ॐ लगाकर नमः शिवाय जपने का अधिकार किसे है?

'ॐ नमः शिवाय' जपने का अधिकार केवल गुरु-दीक्षा के बाद ही प्राप्त होता है — क्योंकि गुरु की कृपा से ही प्रणव 'ॐ' की पूर्ण शक्ति जाग्रत होती है।

#गुरु दीक्षा अधिकार#प्रणव शक्ति#षडाक्षर
षडाक्षर मंत्र और गुरु दीक्षा

'ॐ नमः शिवाय' और 'नमः शिवाय' में क्या अंतर है?

'नमः शिवाय' (पंचाक्षर) कोई भी जप कर सकता है — लेकिन 'ॐ नमः शिवाय' (षडाक्षर) जपने का अधिकार केवल गुरु-दीक्षा के बाद मिलता है क्योंकि गुरु कृपा से ही प्रणव की पूर्ण शक्ति जाग्रत होती है।

#ॐ नमः शिवाय#नमः शिवाय#षडाक्षर पंचाक्षर
षडाक्षर मंत्र और गुरु दीक्षा

षडाक्षर मंत्र क्या होता है?

जब 'नमः शिवाय' के आदि में प्रणव 'ॐ' जोड़ा जाता है तब 'ॐ नमः शिवाय' बनता है जिसे 'षडाक्षर मंत्र' (छह अक्षरों वाला) कहते हैं।

#षडाक्षर मंत्र#ॐ नमः शिवाय#प्रणव
गुरु की अनिवार्यता

प्राण प्रतिष्ठा का अधिकार किसे है?

प्राण प्रतिष्ठा का अधिकार केवल उस साधक या पुरोहित को है जिसने योग्य गुरु से दीक्षा प्राप्त की हो और जो उस मंत्र की जीवंत ऊर्जा को धारण करता हो।

#प्राण प्रतिष्ठा अधिकार#दीक्षित साधक#पुरोहित
गुरु की अनिवार्यता

बिना दीक्षा के मंत्र जपने से क्या होता है?

बिना दीक्षा के मंत्र केवल अक्षर मात्र रह जाते हैं — उनमें चैतन्य का स्फुरण नहीं होता और कुलार्णव तंत्र के अनुसार गुरु के बिना समस्त साधना निष्फल है।

#बिना दीक्षा मंत्र#निष्फल#चैतन्य स्फुरण
गुरु की अनिवार्यता

'शक्तिपात' क्या होता है?

'शक्तिपात' वह प्रक्रिया है जिसमें गुरु दीक्षा के माध्यम से अपनी शक्ति का अंश शिष्य में संचारित करते हैं — इसीलिए बिना दीक्षा के मंत्र केवल अक्षर मात्र रहते हैं।

#शक्तिपात#गुरु शक्ति#दीक्षा
गुरु की अनिवार्यता

प्राण प्रतिष्ठा के लिए गुरु क्यों जरूरी है?

कुलार्णव तंत्र कहता है गुरु के बिना समस्त साधना निष्फल है — दीक्षा में गुरु ज्ञान के साथ अपनी शक्ति का अंश (शक्तिपात) भी शिष्य में संचारित करते हैं जो शास्त्र के निर्जीव अक्षरों को जीवंत बनाता है।

#गुरु अनिवार्यता#कुलार्णव तंत्र#दीक्षा
गुरु कृपा और साधना मर्म

त्रिपुर भैरवी किसका संहार करती हैं?

त्रिपुर भैरवी उसी का संहार करती हैं जो साधक की उन्नति में बाधक है — चाहे बाहरी शत्रु हो या भीतरी विकार (काम, क्रोध आदि)।

#संहार#बाधा नाश#भीतरी विकार
गुरु कृपा और साधना मर्म

मोक्ष का क्या अर्थ है?

मोक्ष का अर्थ है समस्त दुखों से पूर्ण निवृत्ति और अपने शुद्ध, सच्चिदानंद ब्रह्म-स्वरूप में स्थित हो जाना — शास्त्र इसे 'परम पुरुषार्थ' कहते हैं।

#मोक्ष अर्थ#समस्त दुख निवृत्ति#सच्चिदानंद
आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त

पंचांग सहित दैनिक मुहूर्त, राहु काल और चौघड़िया।

पर्व-पञ्चांग
सभी पर्व देखें

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी — पर्व-केन्द्रित प्रश्नोत्तर।

गुरुवार वार — सम्बन्धित प्रश्न — 158 प्रश्न