मंत्र साधनागायत्री मंत्र के 24 अक्षरों के 24 देवतागायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 अलग-अलग देवताओं (जैसे अग्नि, सूर्य, विष्णु, शिव, सरस्वती) का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके जप से शरीर की 24 ग्रंथियां और इन सभी देवताओं की शक्तियां जाग्रत होती हैं।#गायत्री मंत्र#24 अक्षर#देवता
मंदिर ज्ञानमंदिर में परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए? देवी=1, विष्णु=4, गणेश/हनुमान=3, शिव=आधी (सोमसूत्र)। पीपल=11/21। विषम शुभ। शिव: जलप्रणालिका न लांघें → आधी।#परिक्रमा#कितनी#संख्या
लोकशिशुमार चक्र के विभिन्न अंगों में कौन-कौन से देवता और नक्षत्र हैं?शिशुमार चक्र में ध्रुव (पूंछ), सप्तर्षि (कूल्हे), आकाशगंगा (पेट), नारायण (हृदय), मंगल (मुख), शनि (जननांग), बृहस्पति (गर्दन), चंद्र (मन) और बुध (श्वास) में हैं।#शिशुमार चक्र#देवता#नक्षत्र
लोकसुधर्मा सभा में कौन-कौन होते हैं?सुधर्मा सभा में इन्द्र-शची के अलावा सिद्ध, साध्य, महर्षि पराशर, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, व्यासदेव, बृहस्पति, शुक्राचार्य और तुम्बुरु जैसे महान जन उपस्थित रहते हैं।#सुधर्मा#सदस्य#ऋषि
लोकस्वर्ग में कौन-कौन रहता है?स्वर्ग में 33 कोटि देवता, गंधर्व, अप्सराएं, सिद्ध, चारण, विद्याधर, महर्षि और पुण्यकर्मी मनुष्य रहते हैं।#स्वर्ग#निवासी#देवता
मंत्र विधिमंत्र जप में ऋष्यादि न्यास का क्या अर्थ है?'ऋषि-छन्द-देवता न्यास बिना जप = तुच्छ फल।' 7 अंग: ऋषि (शिर), छन्द (मुख), देवता (हृदय), बीज (गुह्य), शक्ति (चरण), कीलक (नाभि), विनियोग (अंजलि)। उदाहरण: नवार्ण — ब्रह्मविष्णुरुद्र ऋषि, गायत्री छन्द, महाकाली-लक्ष्मी-सरस्वती देवता। नाम जप/चालीसा में अनिवार्य नहीं।#ऋष्यादि न्यास#ऋषि#छन्द
लोकदेवता भारत में जन्म लेने की इच्छा क्यों करते हैं?देवता स्वर्ग में भी भारत में जन्म लेना चाहते हैं क्योंकि केवल यहाँ मोक्ष संभव है। विष्णु पुराण में 'गायन्ति देवाः' श्लोक में यही कहा गया है।#देवता#भारतवर्ष#जन्म
तंत्र हवनतंत्र में हवन सामग्री किस मंत्र साधना के लिए अलग होती है?शिव: बेलपत्र/धतूरा। देवी: लाल चंदन/कमलगट्टे/केसर। लक्ष्मी: कमलगट्टे/केसर। गणेश: मोदक/दूर्वा। विष्णु: तुलसी। काली: गुड़। सर्वसाधारण: घी+तिल+जौ+आम समिधा।#हवन#सामग्री#अलग
दिव्यास्त्रआग्नेयास्त्र किस देवता का अस्त्र हैआग्नेयास्त्र अग्निदेव का अस्त्र है। इसका प्रतिकार वारुणास्त्र (वरुणदेव का जल-अस्त्र) था। महाभारत के लगभग सभी प्रमुख योद्धाओं के पास यह अस्त्र था।#आग्नेयास्त्र#अग्निदेव#देवता
माला नियमस्फटिक माला से जप कैसे करें और किस देवता के लिए?देवी/लक्ष्मी सर्वोत्तम। सर्वदेवता मान्य (निष्पक्ष)। गंगाजल+दूध शुद्धि। शुक्रवार/नवरात्रि। स्वच्छ रखें। शुरुआती साधकों हेतु उत्तम।#स्फटिक#माला#जप
घर मंदिरघर के मंदिर में किन देवताओं की मूर्ति नहीं रखनी चाहिए?विवादास्पद। कुछ: नटराज (तांडव/संहार), रौद्र शिव, बड़ी (>9 इंच), खंडित = बचें। शुभ: बालकृष्ण, लक्ष्मी-गणेश, शांत शिव, राधा-कृष्ण। अनेक: 'सभी शुभ, भाव > रूप।'#मूर्ति#नहीं#रखनी
लोकअग्निहोत्र की आहुति देवताओं तक कैसे पहुँचती है?यज्ञ की आहुति का सूक्ष्म तत्व वायु देव के माध्यम से भुवर्लोक से होकर स्वर्लोक के देवताओं तक पहुँचता है। भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच ब्रह्मांडीय संचार मार्ग है।#अग्निहोत्र#आहुति#भुवर्लोक
लोकयज्ञ का भुवर्लोक से क्या संबंध है?यज्ञ की आहुति का सूक्ष्म तत्व भुवर्लोक से होकर देवताओं तक स्वर्लोक में पहुँचता है। भुवर्लोक यज्ञीय ऊर्जाओं और मन्त्रों का ब्रह्मांडीय संवाहक है।#यज्ञ#भुवर्लोक#आहुति
मंत्र जप ज्ञानगुरु मंत्र और इष्ट मंत्र में क्या अंतर होता है?गुरु मंत्र: दीक्षा में प्राप्त, अत्यंत गोपनीय, गुरु+मंत्र शक्ति, मोक्ष। इष्ट: स्वयं चुना/गुरु निर्धारित, कम गोपनीय, कामना+भक्ति। गुरु मंत्र > इष्ट (शक्ति)।#गुरु मंत्र#इष्ट मंत्र#अंतर
माला नियमएक ही माला से अलग-अलग मंत्रों का जप कर सकते हैं या नहीं?आदर्श: अलग माला (ऊर्जा मिश्रण)। व्यावहारिक: स्फटिक = सर्वदेवता। अनुष्ठान = अलग अनिवार्य। शिव=रुद्राक्ष, विष्णु=तुलसी, देवी=स्फटिक/हल्दी।#एक माला#अलग#मंत्र
ध्यान अनुभवध्यान में दिव्य सुगंध आने पर किस देवता की कृपा मानें?चंदन=शिव/विष्णु, कमल/गुलाब=लक्ष्मी/देवी, तुलसी=कृष्ण, कपूर=शिव, केसर=देवी। बिना स्रोत=दिव्य! शुभ=देवता उपस्थिति। कृतज्ञता+ध्यान जारी।#दिव्य#सुगंध#देवता
लोकसमुद्र मंथन में ब्रह्मा जी की भूमिका क्या थी?ब्रह्मा जी देवताओं को विष्णु की शरण में ले गए और समाधान का मार्ग दिखाया।#ब्रह्मा#देवता#विष्णु शरण
लोकसमुद्र मंथन में देवताओं को कम कष्ट क्यों हुआ?देवता वासुकी की पूंछ की ओर थे और विष्णु की कृपा से उन्हें कम कष्ट हुआ।#देवता#वासुकी पूंछ#विष्णु नीति
लोकदेवताओं ने वासुकी की पूंछ क्यों पकड़ी?विष्णु के संकेत से देवताओं ने पूंछ पकड़ी, ताकि वासुकी के विषैले मुख से बच सकें।#देवता#वासुकी पूंछ#विष्णु लीला
लोकदेवता विष्णु जी के पास क्यों गए?देवता अपनी खोई शक्ति और स्वर्ग वापस पाने के लिए विष्णु जी की शरण में गए।#देवता#विष्णु#क्षीरसागर
लोकदुर्वासा के श्राप से देवताओं का क्या हुआ?दुर्वासा के श्राप से देवता तेज, बल और लक्ष्मी से रहित हो गए।#दुर्वासा श्राप#देवता#श्रीहीन
लोकसमुद्र मंथन में अमृत क्यों निकाला गया?देवताओं को अमरता और शक्ति वापस दिलाने के लिए अमृत निकाला गया।#अमृत#समुद्र मंथन#देवता
लोकसमुद्र मंथन किसने किया था?समुद्र मंथन देवताओं और असुरों ने मिलकर भगवान विष्णु की सहायता से किया था।#देवता#असुर#समुद्र मंथन
लोकदेवताओं की शक्ति सीमित क्यों है?क्योंकि देवताओं की शक्ति परब्रह्म से ही प्राप्त होती है।#देवता#शक्ति#परब्रह्म
लोकवायु तिनका क्यों नहीं हिला सके?क्योंकि वायु की शक्ति भी परब्रह्म पर निर्भर है।#वायु#केनोपनिषद#देवता
लोकदेवताओं को अहंकार क्यों हुआ?विजय के बाद देवताओं ने अपनी शक्ति पर गर्व कर लिया।#देवता#अहंकार#यक्ष कथा
लोककेनोपनिषद की यक्ष कथा क्या है?यह देवताओं के अहंकार और परब्रह्म की श्रेष्ठता की कथा है।#केनोपनिषद#यक्ष#देवता
लोकदेवता अव्यक्त अस्त्र क्यों नहीं देख पाते?क्योंकि देवताओं की शक्ति भी परब्रह्म के अधीन और सीमित है।#देवता#केनोपनिषद#अव्यक्त
लोकक्या देवता अव्यक्त अस्त्र देख सकते हैं?नहीं, देवता भी अव्यक्त अस्त्र को नहीं देख सकते।#देवता#अव्यक्त अस्त्र#दृष्टि
लोकमहाप्रलय में देवता कहाँ जाते हैं?वे सूक्ष्म रूप में परमात्मा में लीन हो जाते हैं।#महाप्रलय#देवता#प्रलय
लोकदेवता भगवान शिव की शरण में क्यों गए?त्रिपुरासुरों के अत्याचार से त्रस्त होकर देवता शिव की शरण में गए।#देवता#भगवान शिव#त्रिपुरासुर
लोकत्रिपुरासुरों ने तीनों लोकों में क्या किया?त्रिपुरासुरों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचाया, ऋषियों का संहार किया और देवताओं को स्वर्ग से खदेड़ा।#त्रिपुरासुर#तीनों लोक#देवता
अवतार की कथातारकासुर वध के लिए शिवपुत्र की आवश्यकता क्यों पड़ी?तारकासुर को वरदान था — 'केवल शिव के पुत्र द्वारा ही वध हो सकेगा।' इसलिए देवताओं को शिवपुत्र की आवश्यकता पड़ी। कार्तिकेय ने बड़े होकर देवसेना का नेतृत्व किया और तारकासुर का वध किया।#तारकासुर#शिवपुत्र वरदान#देवता
साक्षी का तत्व दर्शनअग्नि देव किसके साक्षी हैं?अग्नि देव यज्ञ के प्रमुख साक्षी हैं — वे हविष्य (यज्ञ सामग्री) को देवताओं तक पहुंचाते हैं।#अग्नि देव#यज्ञ साक्षी#हविष्य
प्राणों का आवाहननेत्रोन्मीलन क्या होता है?नेत्रोन्मीलन में मंत्रों के साथ शिवलिंग के नेत्र प्रतीकात्मक रूप से खोले जाते हैं — इसका भाव है कि अब देवता इस मूर्ति से देख सकते हैं और भक्तों पर कृपा-दृष्टि डाल रहे हैं।#नेत्रोन्मीलन#नेत्र खोलना#कृपा दृष्टि
रामचरितमानस — बालकाण्डधनुष टूटने पर आकाश से क्या हुआ?देवताओं ने नगाड़े बजाये, अप्सराएँ गायीं, पुष्पवर्षा हुई। ब्रह्मा आदि ने प्रशंसा-आशीर्वाद दिये, किन्नरों ने रसीले गीत गाये। सीताजी के हाथ में जयमाला सुशोभित — सब राजा चकित होकर देखने लगे।#बालकाण्ड#धनुष भंग#देवता
रामचरितमानस — बालकाण्डरावण के अत्याचार से पीड़ित होकर पृथ्वी ने किसके पास फरियाद की?पृथ्वी ने गऊ (गाय) रूप धारण करके मुनियों-देवताओं के पास फरियाद की। सब ब्रह्माजी के पास गये। शिवजी ने कहा — भगवान प्रेम से प्रकट होते हैं। ब्रह्माजी ने स्तुति की और भगवान ने आकाशवाणी से अयोध्या में अवतार का आश्वासन दिया।#बालकाण्ड#पृथ्वी पुकार#गऊ रूप
रामचरितमानस — बालकाण्डरावण ने तीनों लोकों में किस प्रकार का अत्याचार किया?रावण ने — (1) देवताओं को पराजित किया, स्वर्ग में भगदड़ मचाई, (2) कुबेर से लंका-पुष्पक विमान छीना, (3) ब्राह्मण-गौ-देवता-पृथ्वी को कष्ट दिया, (4) यज्ञ बन्द करवाये, (5) संतों-मुनियों को सताया। पुत्र मेघनाद (इन्द्रजीत) अजेय योद्धा था।#बालकाण्ड#रावण अत्याचार#देवता
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवजी के विवाह का प्रस्ताव देवताओं ने किससे रखा?देवताओं ने ब्रह्माजी से विनती की, ब्रह्माजी ने शिवजी से प्रार्थना की। शिवजी ने प्रभु रामजी के वचन याद कर प्रसन्नतापूर्वक कहा — 'ऐसेइ होउ' (ऐसा ही हो)। देवताओं ने नगाड़े बजाये और पुष्पवर्षा की।#बालकाण्ड#शिव विवाह प्रस्ताव#ब्रह्मा
रामचरितमानस — बालकाण्डकामदहन के बाद जगत में क्या प्रभाव पड़ा?चार प्रभाव — (1) देवता डर गये (शिवपुत्र बिना तारकासुर नहीं मरेगा), (2) असुर सुखी हुए, (3) भोगी चिन्तित हुए कामसुख याद कर, (4) साधक-योगी निष्कंटक (काम-बाधा से मुक्त) हो गये।#बालकाण्ड#कामदहन प्रभाव#देवता
रामचरितमानस — बालकाण्डदेवताओं ने शिवजी की तपस्या भंग करने के लिये किसे भेजा?देवताओं ने कामदेव को भेजा। कामदेव ने पहले कहा कि शिवजी से विरोध में मेरी कुशल नहीं, पर परोपकार धर्म मानकर काम स्वीकार किया — 'श्रुति कह परम धरम उपकारा' — वेद कहते हैं उपकार परम धर्म है।#बालकाण्ड#कामदेव#शिव तपस्या
रामचरितमानस — बालकाण्डदेवताओं ने पार्वतीजी की परीक्षा के लिये किन्हें भेजा?सप्तर्षियों (सात ऋषियों) को भेजा। ऋषियों ने पार्वतीजी को देखा — 'मूरतिमंत तपस्या जैसी' — मानो मूर्तिमान तपस्या ही हो। उन्होंने प्रश्न पूछे और शिवजी की निन्दा करके पार्वतीजी का संकल्प डिगाने का प्रयास किया।#बालकाण्ड#सप्तर्षि#पार्वती परीक्षा
देवी-देवता पूजनकमल का फूल किस देवता को चढ़ाते हैं?कमल मुख्यतः माता लक्ष्मी को चढ़ाया जाता है, जो कमल पर विराजती हैं। भगवान विष्णु, सरस्वती और दुर्गा को भी कमल प्रिय है। नील कमल माता दुर्गा को विशेष रूप से अर्पित होता है।#कमल#फूल#देवता
वेद एवं उपनिषदकेनोपनिषद का मुख्य संदेश क्या है?केनोपनिषद का मुख्य संदेश है — ब्रह्म वह परम शक्ति है जो मन, नेत्र, कान सबको चलाती है, पर स्वयं किसी इंद्रिय से नहीं जानी जा सकती। जो मानता है 'मैं जानता हूँ' वह नहीं जानता। इसमें देवताओं के अहंकार-नाश की कथा के माध्यम से यह सिखाया गया है कि समस्त शक्ति ब्रह्म की है।#केनोपनिषद#ब्रह्म#उपनिषद
हिंदू दर्शनयत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते श्लोक का अर्थमनुस्मृति 3.56 — जहां नारियां सम्मानित होती हैं, वहां देवता निवास करते हैं। जहां सम्मान नहीं, सब कर्म निष्फल। 3.57 — जहां स्त्रियां दुःखी, वह कुल नष्ट; जहां प्रसन्न, वह कुल सदा बढ़ता है। 'पूजन' = सम्मान, अधिकार, गरिमा, प्रेम।#नारी सम्मान#मनुस्मृति#श्लोक
वास्तु शास्त्रवास्तु पुरुष कौन है और वास्तु मंडल क्या हैवास्तु पुरुष भूमि का अधिष्ठाता देवता है जो औंधे मुख (सिर ईशान, पैर नैऋत्य) लेटा है। वास्तु मंडल 81 पद (9×9) का ग्रिड है जिसमें 45 देवता विभिन्न स्थानों पर विराजमान हैं — केंद्र में ब्रह्मा। इसी के आधार पर भवन निर्माण किया जाता है।#वास्तु पुरुष#वास्तु मंडल#मयमतम्
वास्तु शास्त्रभूमि पूजन में कौन से देवताओं की पूजा करेंभूमि पूजन में गणेश, भूमि देवी (पृथ्वी माता), वास्तु पुरुष, अष्ट दिक्पाल (इंद्र, अग्नि, यम, निऋति, वरुण, वायु, कुबेर, ईशान), नवग्रह, नाग देवता और विश्वकर्मा की पूजा करें। ईशान कोण से आरंभ करें।#भूमि पूजन#वास्तु पुरुष#निर्माण