विस्तृत उत्तर
देव बलि देवताओं के लिए अन्न का अंश निकालने का विधान है। यह पंचबलि का अंतिम भाग माना जाता है।
त्रयोदशी श्राद्ध में देव बलि क्या है को संदर्भ सहित समझें
त्रयोदशी श्राद्ध में देव बलि क्या है का सबसे सीधा सार यह है: देवताओं के लिए अन्न अर्पण।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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शिशुमार चक्र के विभिन्न अंगों में कौन-कौन से देवता और नक्षत्र हैं?
शिशुमार चक्र में ध्रुव (पूंछ), सप्तर्षि (कूल्हे), आकाशगंगा (पेट), नारायण (हृदय), मंगल (मुख), शनि (जननांग), बृहस्पति (गर्दन), चंद्र (मन) और बुध (श्वास) में हैं।
सुधर्मा सभा में कौन-कौन होते हैं?
सुधर्मा सभा में इन्द्र-शची के अलावा सिद्ध, साध्य, महर्षि पराशर, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, व्यासदेव, बृहस्पति, शुक्राचार्य और तुम्बुरु जैसे महान जन उपस्थित रहते हैं।
स्वर्ग में कौन-कौन रहता है?
स्वर्ग में 33 कोटि देवता, गंधर्व, अप्सराएं, सिद्ध, चारण, विद्याधर, महर्षि और पुण्यकर्मी मनुष्य रहते हैं।
देवता भारत में जन्म लेने की इच्छा क्यों करते हैं?
देवता स्वर्ग में भी भारत में जन्म लेना चाहते हैं क्योंकि केवल यहाँ मोक्ष संभव है। विष्णु पुराण में 'गायन्ति देवाः' श्लोक में यही कहा गया है।
अग्निहोत्र की आहुति देवताओं तक कैसे पहुँचती है?
यज्ञ की आहुति का सूक्ष्म तत्व वायु देव के माध्यम से भुवर्लोक से होकर स्वर्लोक के देवताओं तक पहुँचता है। भुवर्लोक भूलोक और स्वर्लोक के बीच ब्रह्मांडीय संचार मार्ग है।
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