विस्तृत उत्तर
बालकाण्ड में रावण के अत्याचार का वर्णन है। वरदान पाकर रावण ने तीनों लोकों में भयंकर अत्याचार किया।
रावण ने अपनी अपार सेना देखकर अभिमान में भरकर कहा — 'सुनहु सकल रजनीचर जूथा। हमरे बैरी बिबुध बरूथा। ते सनमुख नहिं करहिं लराई। देखि सबल रिपु जाहिं पराई॥'
अर्थ — हे समस्त राक्षसोंके दलो! सुनो, देवतागण हमारे शत्रु हैं। वे सामने आकर युद्ध नहीं करते। बलवान् शत्रुको देखकर भाग जाते हैं।
रावण के प्रमुख अत्याचार:
- 1देवताओं को पराजित किया और स्वर्ग में भगदड़ मचा दी
- 2कुबेर से लंका और पुष्पक विमान छीना
- 3ब्राह्मणों, गौओं, देवताओं और पृथ्वी को कष्ट दिया
- 4यज्ञ-हवन बन्द करवाये
- 5संतों और मुनियों को सताया
- 6सम्पूर्ण विश्व में दया-धर्म को मिटाया
रावण का ज्येष्ठ पुत्र मेघनाद (इन्द्रजीत) जगत के योद्धाओंमें पहला नम्बर था — रणमें कोई भी उसका सामना नहीं कर सकता था।





