विस्तृत उत्तर
रावण के अत्याचार से पीड़ित होकर पृथ्वी ने गऊ (गाय) का रूप धारण करके मुनियों और देवताओं के पास फरियाद की। सब मिलकर ब्रह्माजी के पास गये।
शिवजी ने पार्वतीजी को बताया — देवता बैठकर विचार करने लगे कि प्रभुको कहाँ पावें ताकि उनके सामने पुकार (फरियाद) करें।
चौपाई — 'बैठे सुर सब करहिं बिचारा। कहँ पाइअ प्रभु करिअ पुकारा। पुर बैकुंठ जान कह कोई। कोउ कह पयनिधि बस प्रभु सोई॥'
अर्थ — सब देवता बैठकर विचार करने लगे कि प्रभुको कहाँ पावें ताकि उनके सामने पुकार करें। कोई वैकुण्ठपुरी जानेको कहता था और कोई कहता था कि वही प्रभु क्षीरसमुद्रमें निवास करते हैं।
तब शिवजी (जो उस समाज में उपस्थित थे) ने कहा — भगवान सर्वत्र व्यापक हैं, प्रेम से प्रकट होते हैं। तब ब्रह्माजी ने प्रसन्न होकर भगवान की स्तुति की और भगवान ने आकाशवाणी द्वारा आश्वासन दिया कि वे अयोध्या में अवतार लेंगे।





