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विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन में अमृत इसलिए निकाला गया ताकि देवता फिर से शक्तिशाली, अजर और अजेय बन सकें। दुर्वासा ऋषि के श्राप से देवताओं का तेज और ऐश्वर्य नष्ट हो गया था। असुरों ने इसी कमजोरी का लाभ उठाकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। भगवान विष्णु ने कहा कि क्षीरसागर में अमृत छिपा है और उसके पान से देवता अपनी शक्ति वापस पा सकते हैं। इसलिए देवताओं ने असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन किया। अमृत केवल आयु बढ़ाने वाली वस्तु नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति और धर्म-संतुलन का प्रतीक भी है।
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