विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय की बभ्रुवाहन कथा में निम्नलिखित प्रमुख पात्र हैं।
राजा बभ्रुवाहन — त्रेता युग के महोदय नगर के धर्मपरायण राजा। वे यज्ञानुष्ठानपरायण, दानियों में श्रेष्ठ और ब्राह्मणभक्त थे। वे इस कथा के नायक हैं जो एक अनजान प्रेत के प्रति करुणा दिखाते हैं।
प्रेत — वह जीव जो प्रेत योनि में फँसा हुआ है और जिसे बभ्रुवाहन द्वारा मुक्ति मिलती है। प्रेत स्वयं राजा से प्रेत घट दान की विधि बताता है।
भगवान विष्णु — यह कथा भगवान विष्णु ने गरुड़ को सुनाई। वे इस कथा के परम आधार हैं — उनकी कृपा से ही अंततः प्रेत को मुक्ति मिलती है।
गरुड़ — जिज्ञासु श्रोता जो प्राणियों के उपकार के लिए प्रश्न पूछते हैं।
ब्राह्मण — जिन्हें भोजन और दान-दक्षिणा दी जाती है और जिनके माध्यम से श्राद्ध-दान प्रेत तक पहुँचता है।
इस कथा में सभी पात्र मिलकर एक बड़ा संदेश देते हैं — करुणा, दान और धर्म के मार्ग पर चलने से न केवल स्वयं को बल्कि दूसरों को भी मुक्ति दी जा सकती है।





