विस्तृत उत्तर
बेलपत्र की तीन पत्तियाँ (त्रिदल) प्रकृति के तीन गुणों (सत्त्व, रज, तम), त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और शिव के तीन नेत्रों (सूर्य, चंद्र, अग्नि) का प्रतीक हैं। इसे शिव के त्रिशूल (त्रियायुधम्) के रूप में भी देखा जाता है। दार्शनिक रूप से ये अहंकार ('मैं'), ममत्व ('मेरा') और परायापन की प्रतीक हैं, जिन्हें शिव को समर्पित कर साधक अपने अहंकार का संहार करता है।





