विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान का महत्व अत्यंत विस्तार से बताया गया है — इसे मृत्यु के बाद जीव की सबसे बड़ी सहायता और जीवन का सबसे श्रेष्ठ कर्म कहा गया है।
यममार्ग पर सहायक — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में यमदूत पिटाई के बाद पापियों से कहते हैं — 'सुलभ होने वाले भी जल और अन्न का दान कभी क्यों नहीं दिया?' यह यमदूतों का यह प्रश्न दान के सर्वोपरि महत्व को प्रकट करता है।
स्वर्ग का मार्ग — गरुड़ पुराण के नवें अध्याय में कहा गया है — 'दान के प्रभाव से देवताओं से पूजित होकर वह जीव स्वर्ग को प्राप्त करता है।'
वैतरणी पार करने का साधन — गरुड़ पुराण में 'वैतरणी' नदी के नाम का अर्थ ही दान-पुण्य से पार होना है। 'दान रूपी पुण्य से इस भयानक नदी को नौका पर बैठकर पार किया जा सकता है।'
प्रेत-मुक्ति में भूमिका — मृत्यु के बाद परिजनों का दान प्रेत को शरीर, शक्ति और मुक्ति देता है।
पाप-नाश — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में कहा गया है कि गोदान जैसे महादान से 'कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।'
संक्षेप में — दान ही वह साधन है जो इस लोक और परलोक दोनों में जीव का कल्याण करता है।





