विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण और सनातन शास्त्रों में दान के पात्र का विशेष महत्व बताया गया है।
सुपात्र को दान — सनातन शास्त्रों में 'सुपात्र दान' को श्रेष्ठ माना गया है। सुपात्र वह है जो ज्ञानी, सदाचारी, धर्मपरायण और जरूरतमंद हो।
ब्राह्मण को दान — गरुड़ पुराण में पिंडदान, श्राद्ध और गोदान के विधान में ब्राह्मण को मुख्य पात्र बताया गया है। गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में कहा गया है — 'गोचर्मप्रमाण भूमि विधानपूर्वक सत्पात्र को देता है, वह ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो जाता है।' 'सत्पात्र' शब्द की विशेष महत्ता है।
तीर्थ में दान — 'तीर्थ में सत्पात्र को दी गई एक गाय का दान एक लाख गोदान के तुल्य होता है' — यह गरुड़ पुराण का वचन है। तीर्थ और सत्पात्र का संयोग दान का फल बढ़ाता है।
भूखे और प्यासे को — अन्नदान और जलदान के लिए सबसे उपयुक्त पात्र वह है जो वास्तव में भूखा और प्यासा हो।
संकट में पड़े जीव को — गरुड़ पुराण का मूल संदेश है कि जो भी कष्ट में है, पीड़ित है — वह दान का पात्र है।





