विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान से यममार्ग के कष्ट कम होने का वर्णन तीन स्तरों पर मिलता है।
जीवन के दान से — जिसने जीवन में दान किया उसे यममार्ग पर उसी का फल मिलता है। जिसने अन्नदान किया उसे भोजन मिलता है, जिसने जलदान किया उसे जल मिलता है। जिसने गोदान किया उसे वैतरणी पार कराने के लिए गाय मिलती है।
यमदूतों की प्रसन्नता — गरुड़ पुराण में बताया गया है कि दानी व्यक्ति के साथ यमदूत सौम्य व्यवहार करते हैं। जो दानी नहीं था उसे यमदूत कहते हैं — 'जल और अन्न का दान कभी क्यों नहीं दिया?' — और उसे अधिक यातना देते हैं।
मार्ग में सहायता — गरुड़ पुराण में यममार्ग पर दानी आत्माओं को कहीं-कहीं भोजन और सहायता मिलती है। पापी जीव उन्हें देखकर माँगता है परंतु यमदूत उसे नहीं लेने देते।
तुलनात्मक वर्णन — गरुड़ पुराण में पुण्यात्मा की यात्रा सुखद और पापी की यात्रा कष्टमय बताई गई है। यह भेद मुख्यतः दान-पुण्य के कारण है।
इस प्रकार जीवन का दान यममार्ग पर जीव का सबसे बड़ा साथी बनता है।





