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विस्तृत उत्तर
हिरण्यकशिपु भगवान विष्णु से इसलिए नफरत करता था क्योंकि भगवान वराह ने उसके भाई हिरण्याक्ष का वध किया था। भाई की मृत्यु से उसके भीतर प्रतिशोध और क्रोध भर गया। उसने कठोर तप करके शक्तियाँ प्राप्त कीं और स्वयं को भगवान से भी बड़ा सिद्ध करना चाहा। उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त था, इसलिए हिरण्यकशिपु का क्रोध और बढ़ गया। जय-विजय कथा के अनुसार यह घोर द्वेष भी भगवान की लीला का भाग था, क्योंकि उसी विरोध से उसका उद्धार नृसिंह अवतार द्वारा होना था।
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