विस्तृत उत्तर
कर्ण और भार्गवास्त्र के विषय में महाभारत के प्रामाणिक ग्रंथों और लोक-परंपरा में अंतर है।
प्रामाणिक ग्रंथों का मत — महाभारत के मूल ग्रंथ में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं लिखा कि कर्ण ने 'भार्गवास्त्र' भूल गए थे। परशुराम का शाप था — 'जब तुम्हें सबसे अधिक विद्या की जरूरत होगी तब भूल जाओगे।' यह शाप दिव्य मंत्र-ज्ञान (विशेषतः ब्रह्मास्त्र-संबंधी) पर लागू था। महाभारत के युद्ध में जब कर्ण का रथ धँस गया उस समय उन्होंने ब्रह्मास्त्र का मंत्र भूल जाने का उल्लेख मिलता है।
लोक-परंपरा में — 'भार्गव' शब्द परशुराम से जुड़ा होने के कारण लोक-कथाओं में 'भार्गवास्त्र भूलना' कहा जाने लगा। यह लोक-प्रचलित व्याख्या है, ग्रंथ-सम्मत नहीं।
कर्ण ने भार्गवास्त्र का प्रयोग किया — वास्तव में कर्ण ने भार्गवास्त्र पांडव-सेना पर चलाया था और उससे भारी विनाश हुआ। यह अस्त्र उन्होंने एक बार प्रयोग किया था।





