विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में अनेक प्रकार के दानों का उल्लेख है और उनमें से कुछ को विशेष रूप से श्रेष्ठ बताया गया है।
गोदान — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में गोदान को 'दानों में सर्वश्रेष्ठ' कहा गया है। वैतरणी नदी पार कराने में, नरक यातना से मुक्ति में और पितर-मोक्ष में गोदान का अतुलनीय महत्व है।
भूमिदान — गरुड़ पुराण में कहा गया है कि भूमिदान से 'ब्रह्महत्या जैसे पापों का नाश' होता है। गोचर्मप्रमाण भूमि का दान समस्त पापों का नाशक बताया गया है।
स्वर्णदान — 'ब्रह्मा आदि देवता, ऋषिगण तथा धर्मराज के सभासद स्वर्णदान से संतुष्ट होकर वर प्रदान करने वाले होते हैं।' प्रेत-उद्धार के लिए स्वर्णदान विशेष रूप से बताया गया है।
अन्नदान, जलदान — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में यमदूत पापियों से 'जल और अन्न का दान न देने' का उलाहना देते हैं — यह इनकी अनिवार्यता का प्रमाण है।
तिलदान — मृत्यु के समय तिल का दान पापों को नष्ट करने वाला माना गया है।
वस्त्रदान, पादुका दान — यमदूतों को तृप्त करने वाले दानों में इन्हें बताया गया है।
इस प्रकार गरुड़ पुराण में 'अष्टमहादान' (आठ महादान) का विधान है जिनमें गो, भूमि, स्वर्ण, अन्न, जल, वस्त्र, तिल और घट प्रमुख हैं।





