विस्तृत उत्तर
हाँ। गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय में बभ्रुवाहन की कथा का मूल विषय ही यह है कि दान से प्रेत को मुक्ति मिलती है।
गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है — 'इस प्रकार शय्यादान, नवक आदि श्राद्ध और वृषोत्सर्ग का विधान करने से प्रेत परम गति को प्राप्त होता है।' राजा बभ्रुवाहन ने यही किया — और उस प्रेत को मुक्ति मिली।
दान के प्रकार जो किए गए — प्रेत घट दान (सोने के घड़े में तिल-कुशा रखकर), शय्यादान, ब्राह्मणों को तेरह पददान, वृषोत्सर्ग और अन्य उचित संस्कार।
कथा का अंतिम संदेश — गरुड़ पुराण का यह महावाक्य इस कथा का सार है — 'जब दूसरे के दिए श्राद्ध से प्रेत की सद्गति हुई, तो पुत्र के श्राद्ध से पिता की सद्गति निश्चित है।'
इस प्रकार यह कथा दान की सर्वोच्च शक्ति का जीवंत प्रमाण है — एक धर्मपरायण राजा ने अनजान प्रेत के लिए करुणापूर्वक दान किया और उसे मोक्ष प्राप्त हो गया।





