विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में इस प्रश्न का उत्तर स्पष्ट है — यममार्ग में कष्ट होता है या नहीं, यह पूर्णतः जीव के जीवनकाल के कर्मों पर निर्भर करता है। यह एक ही मार्ग है, परंतु दो भिन्न अनुभव देता है।
पापी जीवात्मा के लिए यममार्ग अत्यंत कष्टकारी है। गरुड़ पुराण में इसका वर्णन करते हुए कहा गया है कि पापी जीव को 'आग की तरह गर्म हवा तथा गर्म बालू' पर चलना पड़ता है। भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह रास्ते में बार-बार गिरता है। यमदूत पीठ पर कोड़े मारते हैं। कुत्ते काटते हैं। नरकों का भय सुनाया जाता है। वैतरणी नदी की भयावह यातना अलग होती है।
पुण्यात्मा के लिए यह मार्ग सुखद है — देवदूतों के साथ दिव्य विमान में यात्रा, कोई कष्ट नहीं। पिंडदान करने वाले परिजन जीवात्मा की इस यात्रा को सुगम बनाते हैं। जिन्होंने दान-पुण्य किए, उन्हें मार्ग में सुख मिलता है।
इसीलिए शास्त्र कहते हैं — जीवन में किए गए पुण्य मृत्यु के बाद भी साथ जाते हैं और इस कठिन यात्रा को सहज बना देते हैं।




