विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में मृत्यु के समय दान का विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण वर्णन है।
मृत्युकालीन दान का फल — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में कहा गया है — 'स्वस्थचित्तावस्था में दी गई एक गौ, आतुरावस्था में दी गई सौ गाय और मृत्युकाल में दी गई एक हजार गाय तथा मरणोत्तर काल में दी गई एक लाख गाय के दान का फल बराबर ही होता है।' यह मृत्युकाल की असाधारण महत्ता को बताता है।
पापों का नाश — मृत्यु के समय किया गया तिल, स्वर्ण, नमक, सप्तधान्य, जलपात्र, लोहा, रुई, भूमि और पादुका का दान — ये सब यमदूतों को शांत करते हैं और पापों को नष्ट करते हैं।
यमलोक की यात्रा सुगम — गरुड़ पुराण में कहा गया है कि मृत्यु के समय का दान यमदूतों को तृप्त करता है जिससे वे जीव के साथ सौम्य व्यवहार करते हैं।
मृत्यु के बाद साथ जाता है — गरुड़ पुराण का सिद्धांत है कि मृत्यु के बाद केवल कर्म साथ जाते हैं। मृत्यु के समय किया गया दान श्रेष्ठ कर्म है जो जीव के साथ यमलोक तक जाता है।
इसीलिए सनातन परंपरा में अंतिम समय में तुलसी, गंगाजल, तिल और गोदान करने का विधान है।





