विस्तृत उत्तर
पर्जन्यास्त्र द्वारा उत्पन्न मूसलाधार वर्षा शत्रु सेना को न केवल शारीरिक रूप से बाधित करती थी बल्कि उनके लिए आगे बढ़ना, हथियार चलाना और अपनी युद्ध-व्यूह रचना बनाए रखना भी कठिन बना देती थी। रथों के पहिए कीचड़ में धंस सकते थे, धनुष की प्रत्यंचाएँ गीली होकर ढीली पड़ सकती थीं और सैनिकों का मनोबल टूट सकता था। यह अस्त्र धारक को एक प्रकार से मौसम पर तात्कालिक नियंत्रण प्रदान करता था, जो युद्ध का पासा पलटने की क्षमता रखता था।
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