विस्तृत उत्तर
प्रतापभानु को जंगल में एक कपटमुनि मिला जो वास्तव में एक पराजित राजा था। उसका नाम 'एकतनु' (कालकेतु) था। प्रतापभानु ने इसी राजा का देश पहले छीन लिया था और वह युद्ध में सेना छोड़कर भाग गया था।
चौपाई — 'फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा। जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई॥'
इसका अर्थ — वनमें फिरते-फिरते उसने एक आश्रम देखा; वहाँ कपटसे मुनिका वेष बनाये एक राजा रहता था, जिसका देश राजा प्रतापभानुने छीन लिया था और जो सेनाको छोड़कर युद्धसे भाग गया था।
वह कपटमुनि मन ही मन प्रतापभानु से बदला लेना चाहता था। उसने धीरे-धीरे राजा का विश्वास जीता और फिर छलकपट करके उसे ब्राह्मणों के शाप का शिकार बनाया।


