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जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

प्रेत अवस्था का कारण क्या बताया गया है?

गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में प्रेत-अवस्था के उत्पन्न होने के अनेक कारण बताए गए हैं।

संक्षिप्त उत्तर

गरुड़ पुराण में प्रेत-अवस्था के कारण हैं — अकाल मृत्यु, परिवार-संपत्ति का मोह, शास्त्रोक्त संस्कारों का अभाव, पापकर्म (संपत्ति हड़पना, व्यभिचार, द्रोह) और मृत्युकालीन तीव्र वासनाएँ।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण के प्रेतकल्प में प्रेत-अवस्था के उत्पन्न होने के अनेक कारण बताए गए हैं।

अकाल मृत्यु — सबसे प्रमुख कारण। दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या, सर्पदंश, जल-अग्नि से मृत्यु — इन सभी में आत्मा अप्राकृतिक रूप से शरीर छोड़ती है। ऐसे में अपनी शेष प्राकृतिक आयु तक प्रेत योनि में रहना पड़ता है।

अपूर्ण इच्छाएँ और मोह — गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जो आत्मा परिवार, संपत्ति या संसार से अत्यधिक मोहग्रस्त है, वह मृत्यु के बाद भी आगे नहीं बढ़ पाती।

शास्त्रोक्त संस्कारों का अभाव — जिनका उचित अंतिम संस्कार नहीं हुआ, पिंडदान-श्राद्ध नहीं किया गया — वे भी प्रेत योनि में भटकते हैं।

पापकर्म — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'जो व्यक्ति दूसरों की संपत्ति हड़प करता है, मित्र से द्रोह करता है, विश्वासघात करता है, परायी स्त्री से व्यभिचार करता है, निर्बल को सताता है — ऐसा व्यक्ति प्रेत योनि में अवश्य जाता है।'

मृत्युकालीन वासनाएँ — जब मृत्यु के समय जीव के मन में क्रोध, लोभ, भय या तीव्र इच्छा हो — वह भी प्रेत-अवस्था का कारण बनती है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

प्रेत अवस्था का कारण क्या बताया गया है को संदर्भ सहित समझें

प्रेत अवस्था का कारण क्या बताया गया है का सबसे सीधा सार यह है: गरुड़ पुराण में प्रेत-अवस्था के कारण हैं — अकाल मृत्यु, परिवार-संपत्ति का मोह, शास्त्रोक्त संस्कारों का अभाव, पापकर्म (संपत्ति हड़पना, व्यभिचार, द्रोह) और मृत्युकालीन तीव्र वासनाएँ।

जीवन एवं मृत्यु जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।

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