विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के पहले अध्याय में यमदूतों के स्वरूप का जो वर्णन है वह इस प्रकार है — वे दो की संख्या में आते हैं। उनका शरीर कौए के समान काले रंग का होता है। उनके केश ऊपर की ओर खड़े होते हैं। मुख टेढ़ा-मेढ़ा और विकराल होता है। नेत्र क्रोध और भय से भरे, लाल-लाल होते हैं। वे नग्न अवस्था में होते हैं। दाँतों से कड़कड़ाहट की ध्वनि करते हैं जो सुनने में ही भयावह लगती है। उनके नख (नाखून) बड़े, तीखे और आयुध (हथियार) के समान होते हैं।
हाथों में वे पाश (फंदा) और दंड (डंडा) लिए होते हैं। उनका आकार-प्रकार यम के दंड-विधान का प्रतीक है — वे न्याय के दूत हैं जो पापी को उसके कर्मफल तक ले जाते हैं।
यह वर्णन इस सत्य की ओर संकेत करता है कि पाप का मार्ग अंततः भयावह है। जो जीव ईश्वर की शरण लेता है, उसे यमदूतों के इस भयावह स्वरूप का सामना नहीं करना पड़ता — उसके लिए दिव्य, सुंदर और शांत देवदूत आते हैं जो उसे स्वर्ग या मोक्ष की ओर ले जाते हैं।





