विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यमदूतों के नखों और दाँतों का वर्णन विशेष रूप से किया गया है और इनका एक गहरा प्रतीकात्मक अर्थ है।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — यमदूतों के 'नख आयुध की भाँति' होते हैं और वे 'दाँतों को कटकटाते हुए' आते हैं। यह वर्णन इस बात का संकेत देता है कि उनके पास भौतिक शस्त्रों की आवश्यकता भी नहीं — उनका स्वयं का शरीर ही शस्त्र है।
नखों का वर्णन — 'आयुध जैसे नख' यह बताते हैं कि यमदूत जीव को नियंत्रित करने और पकड़ने में स्वाभाविक रूप से समर्थ हैं। यह पाप के उस परिणाम का प्रतीक है जो जीव पर हर तरफ से आक्रामक होता है — कोई बचाव नहीं, कोई छुपाव नहीं।
दाँतों की कटकटाहट — यह भय उत्पन्न करने वाली ध्वनि है। यह यमदूतों की क्रोध और दंड देने की तत्परता का प्रतीक है। पाप के न्यायाधीश दया से नहीं, नियम से काम करते हैं।
गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में इन्हें 'बड़ी-बड़ी दाढ़ों वाले' और 'भयंकर मुख वाले' भी कहा गया है। यह पाप के उस भयावह परिणाम का दर्शन है जो उस व्यक्ति को दिखता है जिसने जीवन में धर्म की उपेक्षा की।
इस प्रकार यह वर्णन साहित्यिक भयावहता नहीं — पाप और उसके परिणाम का जीवंत चित्रण है।



