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विस्तृत उत्तर
यममार्ग श्वान, मक्खियों और सियारों के भयानक रुदन से भरा हुआ है। पापी जीव का पिण्डज शरीर इस यात्रा में यातना देह में बदल जाता है। इस मार्ग पर उसका शरीर कौवों, कुत्तों आदि द्वारा खाया, फाड़ा और भेदा जाता है। वह भूख, प्यास और थकान से पीड़ित होकर यमराज के दरबार की ओर घसीटा जाता है। मार्ग तपते सूर्य की ज्वालाओं से दग्ध है और वहाँ छाया या विश्राम का कोई स्थान नहीं है।
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