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यममार्ग में जीव अकेला क्यों होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार यममार्ग पर जीव अकेला होता है क्योंकि कर्म व्यक्तिगत हैं — फल भी अकेले भोगना होता है।

संक्षिप्त उत्तर

गरुड़ पुराण के अनुसार यममार्ग पर जीव अकेला होता है क्योंकि कर्म व्यक्तिगत हैं — फल भी अकेले भोगना होता है। कोई परिजन, धन या मित्र साथ नहीं जाता। केवल अपने सत्कर्म मृत्यु के बाद साथ जाते हैं।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में यममार्ग की एक अत्यंत मर्मस्पर्शी बात यह है कि पापी जीव इस मार्ग पर अकेला होता है। जीवन में जिसके साथ लाखों थे, मृत्यु के बाद वह सब अकेला है।

गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु गरुड़ से कहते हैं — 'कुटुंब के भरण-पोषण में ही निरंतर लगा रहने वाला व्यक्ति अंत में रोते-बिलखते बंधु-बांधवों के बीच उत्कट वेदना से मर जाता है।' परंतु वे बंधु-बांधव यममार्ग पर साथ नहीं जाते।

यममार्ग पर अकेलेपन के तीन मुख्य कारण हैं:

पहला — कर्म व्यक्तिगत होते हैं। पाप और पुण्य किसी के साथ बाँटे नहीं जा सकते। जो कर्म किए, वे स्वयं ने किए — उनका फल भी स्वयं को ही भोगना है। कोई पत्नी, पुत्र, मित्र या धन साथ नहीं जाता।

दूसरा — यमदूत केवल पापी जीव को ले जाते हैं। वे किसी और का साथ नहीं स्वीकार करते।

तीसरा — यह अकेलापन उस व्यक्ति के जीवन का प्रतिबिंब है जिसने दूसरों को अनदेखा करके केवल अपने स्वार्थ की चिंता की।

इसीलिए शास्त्र कहते हैं — जीवन में अकेले कमाए सत्कर्म ही मृत्यु के बाद साथ जाते हैं। बाकी सब यहीं छूट जाता है।

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