विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यममार्ग पर कोई सहायता न मिलने का कारण अत्यंत स्पष्ट और तर्कपूर्ण है।
गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'वैतरणी नदी के बीच में गिरे हुए पापियों की रक्षा करने वाला कोई नहीं है।' यह वर्णन उस सत्य को प्रकट करता है जो शास्त्रों का केंद्रीय संदेश है — कर्म का फल स्वयं को ही भोगना होता है।
पहला कारण — पाप अकेले किए जाते हैं, फल भी अकेले भोगना होता है। जब किसी ने छल किया, चोरी की, हिंसा की — तो दूसरों ने उसमें भाग नहीं लिया। उसी प्रकार उस पाप का दंड भी स्वयं को भोगना है।
दूसरा कारण — यमराज का न्याय निर्मम और निरपेक्ष है। वहाँ कोई सिफारिश नहीं चलती, कोई पैसे से नहीं बचा सकता, कोई रिश्ता काम नहीं आता। यमदूत किसी की सहायता नहीं करते — वे न्याय के दूत हैं।
तीसरा कारण — यह पाप का स्वाभाविक एकांत है। जिस व्यक्ति ने जीवन में दूसरों के कष्ट में सहायता नहीं की, वह मृत्यु के बाद सहायता का अधिकारी नहीं रहता।
हालाँकि — जिन परिजनों ने पिंडदान और श्राद्ध किया हो, उससे जीव को कुछ शक्ति और सहारा मिलता है। दान-पुण्य और ईश्वर-भक्ति जीवात्मा को सहायता देती है। यही सच्ची सहायता है जो जीवन में अर्जित होती है।



