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लोक प्रश्नोत्तरी — 3617 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित लोक विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 3617 प्रश्न

लोक

गरुड़ पुराण में अजामिल का उदाहरण क्यों दिया गया है?

अजामिल ने मृत्यु के समय अपने पुत्र 'नारायण' को पुकारा था। भगवान के नाम के प्रभाव से विष्णुदूत प्रकट हुए और यमदूतों से बचाकर वैकुंठ भेजा। यह नाम-महिमा का प्रमाण है।

अजामिलगरुड़ पुराणनारायण नाम
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सुधर्मा सभा 'काम-गामिनी' क्यों कहलाती है?

सुधर्मा सभा को काम-गामिनी इसलिए कहते हैं क्योंकि यह स्थिर संरचना नहीं है — यह इच्छानुसार आकाश में तीव्र या मंद गति से विचरण कर सकती है।

सुधर्माकाम-गामिनीआकाश
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स्वर्लोक में श्राद्ध का फल गंधर्व, नाग और पशु योनि में कैसे मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार गंधर्व योनि में श्राद्ध कलाओं के रूप में, नाग योनि में वायु के रूप में और पशु योनि में घास के रूप में मिलता है।

श्राद्धगंधर्वनाग
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मीमांसा दर्शन में स्वर्ग की परिभाषा क्या है?

मीमांसा दर्शन के अनुसार स्वर्ग वह सुख है जो दुःख से मिश्रित नहीं है, जिसके बाद कोई पतन नहीं और जो केवल इच्छा करने मात्र से प्राप्त हो जाता है।

मीमांसास्वर्ग परिभाषादुःख मुक्त
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विष्णु पुराण और भागवत पुराण में स्वर्लोक के वर्णन में क्या अंतर है?

विष्णु पुराण स्वर्लोक को कालगणना और प्रलय से जोड़ता है जबकि भागवत पुराण इसका विस्तृत भौगोलिक, खगोलीय और भक्ति-दृष्टिकोण से वर्णन करता है।

विष्णु पुराणभागवत पुराणस्वर्लोक
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स्वर्लोक के खगोलीय वर्णन में आकाशगंगा को क्या कहा गया है?

भागवत पुराण में शिशुमार चक्र के वर्णन में आकाशगंगा को शिशुमार का 'पेट' (Belly) कहा गया है — यह भगवान वासुदेव के विराट स्वरूप का एक दृश्यमान अंग है।

आकाशगंगाशिशुमारस्वर्लोक
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शिशुमार चक्र का ध्यान करने से क्या फल मिलता है?

शिशुमार चक्र का दिन में तीन बार स्मरण और नमन करने से उस समय के समस्त पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ 'नमो ज्योतिर्लोकाय' मंत्र का जाप करते हैं।

शिशुमार चक्रध्यानपाप नाश
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शिशुमार चक्र के विभिन्न अंगों में कौन-कौन से देवता और नक्षत्र हैं?

शिशुमार चक्र में ध्रुव (पूंछ), सप्तर्षि (कूल्हे), आकाशगंगा (पेट), नारायण (हृदय), मंगल (मुख), शनि (जननांग), बृहस्पति (गर्दन), चंद्र (मन) और बुध (श्वास) में हैं।

शिशुमार चक्रदेवतानक्षत्र
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शिशुमार चक्र में ध्रुव तारा किस स्थान पर है?

शिशुमार चक्र की पूंछ के अंतिम छोर पर ध्रुव तारा स्थित है। यही इस पूरे चक्र की धुरी है जिसके चारों ओर सभी ग्रह-नक्षत्र परिक्रमा करते हैं।

शिशुमार चक्रध्रुव तारापूंछ
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शाक द्वीप में किसकी पूजा होती है?

शाक द्वीप में ऋतव्रत, सत्यव्रत, दानव्रत और अनुव्रत नामक निवासी प्राणायाम और अष्टांग योग द्वारा वायु देव (प्राणतत्व) की उपासना करते हैं।

शाक द्वीपवायु देवयोग
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क्रौंच द्वीप में किसकी उपासना होती है?

क्रौंच द्वीप में पुरुष, ऋषभ, द्रविण और देवक नामक निवासी जल के अधिष्ठाता वरुण देव की उपासना करते हैं।

क्रौंच द्वीपवरुण देवजल देवता
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कुश द्वीप में किसकी पूजा होती है?

कुश द्वीप में कुशल, कोविद, अभियुक्त और कुलक नामक चार वर्ण के निवासी भगवान हरि के अग्नि स्वरूप (जातवेद) की पूजा करते हैं।

कुश द्वीपअग्नि देवजातवेद
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स्वर्लोक में देवताओं का शरीर कैसा होता है?

स्वर्ग में देवताओं को सात्त्विक ऊर्जा से बनी 'भोग-देह' मिलती है जो पंचभौतिक नहीं होती। इसमें भूख-प्यास-बुढ़ापा नहीं होता और यह दिव्य आभा से युक्त होती है।

स्वर्लोकदेव शरीरभोग देह
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नैमित्तिक प्रलय में स्वर्लोक का क्या होता है?

नैमित्तिक प्रलय में ब्रह्मा के एक दिन (कल्प) के अंत में संवर्तक अग्नि से स्वर्लोक भी भस्म हो जाता है। तब स्वर्लोक के निवासी महर्लोक या जनलोक चले जाते हैं।

नैमित्तिक प्रलयस्वर्लोकब्रह्मा
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महर्षि दधीचि की अस्थियों का स्वर्लोक से क्या संबंध है?

महर्षि दधीचि ने स्वर्लोक की रक्षा के लिए अपना शरीर त्याग दिया। उनकी अस्थियों से बने वज्र से इन्द्र ने वृत्रासुर का वध किया। यह बलिदान स्वर्लोक के इतिहास में अमर है।

दधीचिअस्थिवज्र
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वृत्रासुर और इन्द्र का युद्ध कैसे हुआ?

त्वष्टा ने पुत्र विश्वरूप के वध से क्रोधित होकर हवन से वृत्रासुर उत्पन्न किया। इन्द्र भयभीत हुए, फिर दधीचि की अस्थियों से बने वज्र से वृत्रासुर का वध किया।

वृत्रासुरइन्द्रयुद्ध
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इन्द्र की सुधर्मा सभा में कौन से ऋषि आते हैं?

सुधर्मा सभा में महर्षि पराशर, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, व्यासदेव, हरिश्चन्द्र, विश्वकर्मा, तुम्बुरु, बृहस्पति, शुक्राचार्य और भृगु-सप्तर्षि आते हैं।

सुधर्माऋषिनारद
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मानसोत्तर पर्वत क्या है?

मानसोत्तर 10,000 योजन ऊँचा पर्वत है जो पुष्कर द्वीप के मध्य में है। इस पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं — यह स्वर्लोक का प्रशासनिक केंद्र है।

मानसोत्तर पर्वतपुष्कर द्वीपइन्द्र राजधानी
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पुष्कर द्वीप में ब्रह्मा जी का आसन कैसा है?

पुष्कर द्वीप में 10 करोड़ पंखुड़ियों वाला विशाल स्वर्ण कमल है जो ब्रह्मा जी का आसन है। यहाँ मानसोत्तर पर्वत पर इन्द्र, यम, वरुण और चंद्र की राजधानियाँ हैं।

पुष्कर द्वीपब्रह्माकमल
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शाल्मल द्वीप में गरुड़ का क्या महत्व है?

शाल्मल द्वीप में विशाल शाल्मली वृक्ष पर भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ देव का निवास है। यहाँ के निवासी चंद्र देव की पूजा करते हैं।

शाल्मल द्वीपगरुड़विष्णु
लोक

प्लक्ष द्वीप में किसकी उपासना होती है?

प्लक्ष द्वीप में हंस, पतंग, ऊर्ध्वायन और सत्यांग नाम के निवासी 1000 वर्षों तक देवताओं जैसा जीवन जीते हैं और सूर्य देव की उपासना करते हैं।

प्लक्ष द्वीपसूर्य देवउपासना
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स्वर्लोक में सप्तर्षि मंडल कहाँ है?

सप्तर्षि मंडल शिशुमार चक्र के कूल्हे पर स्थित है। यह ध्रुवलोक से 13 लाख योजन नीचे है। इसमें सात महान ऋषियों का निवास माना जाता है।

सप्तर्षि मंडलस्वर्लोकशिशुमार
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ध्रुवलोक का स्वर्लोक से क्या संबंध है?

ध्रुवलोक स्वर्लोक की सर्वोच्च सीमा है जो सप्तर्षि मंडल से 13 लाख योजन ऊपर है। शिशुमार चक्र की धुरी ध्रुवलोक है जिसके चारों ओर सभी ग्रह परिक्रमा करते हैं।

ध्रुवलोकस्वर्लोकसर्वोच्च सीमा
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शिशुमार चक्र क्या है?

शिशुमार चक्र भगवान वासुदेव का विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप है जिसमें समस्त ग्रह, नक्षत्र और तारे विभिन्न अंगों में स्थित हैं। इसकी धुरी ध्रुवलोक है।

शिशुमार चक्रस्वर्लोकग्रह नक्षत्र

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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