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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तरी — 429 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्रीमद्भागवत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत

जब श्राद्ध से मुक्ति न मिले तो क्या करें?

धुंधुकारी की कथा में श्राद्ध से मुक्ति न मिलने पर सूर्यदेव ने श्रीमद्भागवत सप्ताह पारायण का उपाय बताया।

श्राद्धमुक्तिभागवत सप्ताह
श्रीमद्भागवत

क्या श्राद्ध से हर आत्मा मुक्त हो जाती है?

कथा में धुंधुकारी के लिये गया श्राद्ध हुआ, फिर भी मुक्ति नहीं मिली; उसे भागवत सप्ताह से मुक्ति मिली।

श्राद्धगया श्राद्धप्रेत मुक्ति
श्रीमद्भागवत

प्रेत योनि में आत्मा क्या भोगती है?

कथा में प्रेत योनि भूख-प्यास, शीत-ताप, दिशाओं में भटकाव, आश्रयहीनता और कर्मफल-भोग से भरी बताई गई है।

प्रेत योनिभूख प्यासकर्मफल
श्रीमद्भागवत

पापी व्यक्ति को मृत्यु के बाद क्या कष्ट मिलते हैं?

धुंधुकारी के उदाहरण में पापी व्यक्ति मृत्यु के बाद प्रेत बनकर दिशाओं में भटकता, भूख-प्यास और शीत-घाम सहता है।

पापी व्यक्तिमृत्युप्रेत योनि
श्रीमद्भागवत

लोभ और वासना का अंत क्या होता है?

धुंधुकारी वासना और लोभ में अंधा होकर चोरी में लगा और अंत में जिनके लिये धन लाया उन्हीं के हाथ मारा गया।

लोभवासनाकुसंग
श्रीमद्भागवत

गलत संगति से जीवन कैसे नष्ट होता है?

गलत संगति ने धुंधुकारी को चोरी, वासना, हिंसा और अंत में हत्या तथा प्रेत योनि तक पहुँचा दिया।

गलत संगतिजीवनधुंधुकारी
श्रीमद्भागवत

कुसंग का परिणाम क्या होता है?

कुसंग से धुंधुकारी की बुद्धि नष्ट हुई, उसने चोरी और क्रूर कर्म किए और अंत में उसी संगति ने उसकी हत्या कर दी।

कुसंगलोभधुंधुकारी
श्रीमद्भागवत

बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद क्या होता है?

धुंधुकारी के उदाहरण में बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद प्रेत योनि, भूख-प्यास, भटकाव और असहायता के रूप में आया।

बुरे कर्मकर्मफलमृत्यु
श्रीमद्भागवत

मरने के बाद प्रेत योनि क्यों मिलती है?

इस कथा में धुंधुकारी अपने कुकर्मों, हिंसा और अपने ही दोष से प्रेत योनि में पड़ा बताया गया है।

प्रेत योनिकर्मफलमृत्यु
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह प्रेत बाधा में कैसे मदद करता है?

धुंधुकारी की प्रेत बाधा गया श्राद्ध से नहीं गई, पर भागवत सप्ताह सुनने से वह प्रेत योनि छोड़ सका।

प्रेत बाधाभागवत सप्ताहमुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह से पाप कैसे मिटते हैं?

कथा में भागवत सप्ताह को आग की तरह बताया गया है, जो मन, वचन और कर्म से हुए छोटे-बड़े पापों को जला देता है।

भागवत सप्ताहपाप नाशश्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से प्रेत मुक्ति कैसे होती है?

सूर्यदेव ने भागवत सप्ताह को मुक्ति का उपाय बताया; सात दिन कथा सुनकर धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ।

भागवत कथाप्रेत मुक्तिसप्ताह
श्रीमद्भागवत

गया श्राद्ध के बाद भी प्रेत बाधा क्यों रहती है?

कथा में धुंधुकारी के अपने दोष और असंख्य कुकर्म इतने भारी बताए गए हैं कि गया श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं हुई।

गया श्राद्धप्रेत बाधाकर्मफल
श्रीमद्भागवत

गया श्राद्ध से मुक्ति क्यों नहीं मिली?

धुंधुकारी ने कहा कि सैकड़ों गया-श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं होगी, इसलिए दूसरा उपाय चाहिए।

गया श्राद्धप्रेत मुक्तिधुंधुकारी
श्रीमद्भागवत

प्रेत आत्मा को शांति कैसे मिले?

कथा में प्रेत आत्मा को अंतिम शांति श्रीमद्भागवत सप्ताह के श्रवण और मनन से मिली।

प्रेत आत्माशांतिश्राद्ध
श्रीमद्भागवत

प्रेत योनि से मुक्ति कैसे मिलती है?

इस कथा में प्रेत योनि से मुक्ति का उपाय श्रीमद्भागवत का सात दिन का पारायण बताया गया है।

प्रेत योनिमुक्तिभागवत सप्ताह
श्रीमद्भागवत

दशम स्कंध पाठ से आत्मदेव को क्या मिला?

कथा के अंत में कहा गया है कि आत्मदेव ने दशम स्कंध का नियमपूर्वक पाठ करके भगवान श्रीकृष्ण के चरण प्राप्त किए।

दशम स्कंधआत्मदेवकृष्णचरण
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को कृष्ण की प्राप्ति कैसे हुई?

आत्मदेव ने गोकर्ण के उपदेश से घर छोड़ा, वन में हरि सेवा की और नियमपूर्वक दशम स्कंध का पाठ करके श्रीकृष्ण को प्राप्त किया।

आत्मदेवकृष्ण प्राप्तिदशम स्कंध
श्रीमद्भागवत

वन में आत्मदेव को क्या करना था?

गोकर्ण ने आत्मदेव को वन में शरीर-अभिमान और ममता छोड़कर भजन, साधुसेवा, काम-तृष्णा त्याग और कथा-रस में लगने को कहा।

आत्मदेववनगोकर्ण उपदेश
श्रीमद्भागवत

पुत्र मोह क्यों छोड़ना चाहिए?

गोकर्ण कहते हैं कि पुत्र-मोह अज्ञान है, मोह से नरक की प्राप्ति होती है और शरीर भी नश्वर है।

पुत्र मोहगोकर्णआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण ने संसार को असार क्यों कहा?

गोकर्ण ने संसार को दुखरूप, मोहक और क्षणभंगुर कहा; पुत्र, धन और शरीर को स्थायी मानना अज्ञान बताया।

संसारगोकर्णवैराग्य
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण ने आत्मदेव को क्या समझाया?

गोकर्ण ने आत्मदेव को संसार की असारता, पुत्र-धन के मोह का दुख, शरीर की नश्वरता और भजन-साधुसेवा का मार्ग समझाया।

गोकर्णआत्मदेववैराग्य
श्रीमद्भागवत

कुपुत्र से क्या दुख होता है?

धुंधुकारी के उदाहरण से कथा बताती है कि कुपुत्र धन, घर और माता-पिता की शांति नष्ट कर देता है और मोह को दुख में बदल देता है।

कुपुत्रधुंधुकारीआत्मदेव
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव का धन कैसे नष्ट हुआ?

पहले आत्मदेव ने संतान के लिये आधा धन धर्मकर्म और दान में लगाया; बाद में धुंधुकारी ने कुसंग से पिता की संपत्ति नष्ट कर दी।

आत्मदेवधनधुंधुकारी

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