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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — 13772 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13772 प्रश्न

लोक

हंस और सोहम का संबंध

हंस मंत्र श्वास का नाद है और सोहम उसका अद्वैत अर्थ है: वह मैं हूँ।

हंससोहमअजपा जाप
लोक

हंस मंत्र क्या है

हंस मंत्र श्वास और आत्मबोध से जुड़ा सोहम भाव का योगिक मंत्र है।

हंस मंत्रसोहमश्वास
लोक

सोहम मंत्र क्या है

सोहम मंत्र का अर्थ है वह परमात्मा मैं ही हूँ।

सोहम मंत्रहंस मंत्रयोग
लोक

परमहंस अवस्था क्या है

परमहंस अवस्था आत्मज्ञान और पूर्ण वैराग्य की सर्वोच्च स्थिति है।

परमहंसहंस अवतारआत्मज्ञान
लोक

जीवन्मुक्त कौन होता है

जीवन्मुक्त देह में रहते हुए भी आत्मज्ञान से देह-अभिमान से मुक्त व्यक्ति है।

जीवन्मुक्तहंस गीताआत्मज्ञान
लोक

विवेक की तलवार क्या है

विवेक की तलवार आत्मा और माया में भेद करने वाली ज्ञान-दृष्टि है।

विवेकहंस गीताहृदय ग्रंथि
लोक

हृदय ग्रंथि क्या है

हृदय ग्रंथि अहंकार और ममता की अज्ञान-जनित गाँठ है।

हृदय ग्रंथिअहंकारमाया
लोक

हंस गीता में आत्मा का स्वरूप

हंस गीता में आत्मा को मन, शरीर और अवस्थाओं से अलग साक्षी चेतना कहा गया है।

आत्माहंस गीतासाक्षी
लोक

हंस अवतार में हंस का प्रतीक क्या है

हंस शुद्धता, विवेक और परमहंस आत्मज्ञान का प्रतीक है।

हंस प्रतीकविवेकपरमहंस
लोक

नीर क्षीर विवेक क्या है

नीर-क्षीर विवेक सार और असार में भेद करने की आध्यात्मिक क्षमता है।

नीर क्षीर विवेकहंसविवेक
लोक

जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति तुरीय क्या है

जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति अनुभव की अवस्थाएँ हैं; तुरीय उनसे परे आत्मा की साक्षी अवस्था है।

जाग्रतस्वप्नसुषुप्ति
लोक

हंस गीता में तुरीय अवस्था

तुरीय अवस्था जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति से परे आत्मा की साक्षी चेतना है।

तुरीय अवस्थाहंस गीताआत्मा
लोक

हंस गीता में मन और विषय का संबंध

हंस गीता में मन-विषय संबंध को देहाभिमान से उत्पन्न बंधन बताया गया है।

मन और विषयहंस गीतामोक्ष
लोक

हंस अवतार ने आप कौन हैं प्रश्न का क्या उत्तर दिया

भगवान हंस ने कहा कि आत्मा के स्तर पर मैं और तुम का भेद मिथ्या है।

आप कौन हैंहंस गीताअद्वैत
लोक

हंस अवतार ने क्या उपदेश दिया

हंस अवतार ने आत्मा को मन, शरीर और माया से अलग साक्षी बताया।

हंस उपदेशआत्मज्ञानमोक्ष
लोक

ब्रह्मा हंस गीता का उत्तर क्यों नहीं दे सके

ब्रह्मा रजोगुणी सृष्टि-कर्म में आच्छादित थे, इसलिए वे मोक्ष का सूक्ष्म उत्तर न दे सके।

ब्रह्माहंस गीतारजोगुण
लोक

सनकादिक मुनियों ने ब्रह्मा से क्या पूछा

उन्होंने पूछा कि मोक्ष चाहने वाला साधक मन और विषयों का बंधन कैसे तोड़े।

सनकादिक प्रश्नब्रह्मामन विषय
लोक

तमस मोह महा मोह क्या है

तमस् देह-अज्ञान, मोह ममता और महा-मोह भोग-विलास की अंधी आसक्ति है।

तमस्मोहमहा मोह
लोक

अंध तामिस्र क्या है

अंध-तामिस्र शरीर को ही सब कुछ मानने से उत्पन्न मृत्यु-भय है।

अंध तामिस्रमृत्यु भयअविद्या
लोक

तामिस्र क्या है

तामिस्र वह अज्ञान है जिसमें जीव ईर्ष्या, क्रोध और स्वतंत्र भोक्ता-भाव में फँसता है।

तामिस्रअविद्याक्रोध
लोक

पंचपर्वा अविद्या क्या है

पंचपर्वा अविद्या अज्ञान के पाँच रूप हैं: तामिस्र, अंध-तामिस्र, तमस्, मोह और महा-मोह।

पंचपर्वा अविद्याअज्ञानमाया
लोक

ब्रह्मा ने अविद्या क्यों बनाई

ब्रह्मा ने जीवों को कर्मफल भोगने योग्य भौतिक जगत में बाँधने के लिए अविद्या रची।

अविद्याब्रह्मासृष्टि
लोक

सनकादिक मुनि कौन थे

सनकादिक मुनि ब्रह्मा के चार मानस पुत्र और जन्म से विरक्त ब्रह्मज्ञानी थे।

सनकादिक मुनिब्रह्मा मानस पुत्रचार कुमार
लोक

हंस अवतार और सनकादिक मुनि

हंस अवतार सनकादिक मुनियों के मोक्ष-संबंधी प्रश्न का उत्तर देने के लिए प्रकट हुआ।

हंस अवतारसनकादिक मुनिसनक सनन्दन

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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