विस्तृत उत्तर
विवेक की तलवार वह आध्यात्मिक दृष्टि है जिससे साधक सत्य और असत्य, आत्मा और शरीर, माया और ब्रह्म में भेद कर पाता है। हंस गीता में भगवान हंस कहते हैं कि अज्ञान से बनी हृदय ग्रंथि को विवेक से काटना चाहिए। यह विवेक गुरु के उपदेश, शास्त्र-श्रवण, स्वाध्याय, ध्यान और सत्संग से तेज होता है। जब साधक देखता है कि मन और विषय अस्थायी हैं और आत्मा शाश्वत साक्षी है, तब उसका अहंकार ढीला पड़ता है। यही विवेक की तलवार है, जो मोह और महा-मोह को काटकर मोक्ष का मार्ग खोलती है।
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