विस्तृत उत्तर
ब्रह्मा जी सनकादिक मुनियों के प्रश्न का उत्तर इसलिए नहीं दे सके क्योंकि वे उस समय सृष्टि-रचना के रजोगुणी कार्य में गहराई से लगे हुए थे। वे अत्यंत ज्ञानी और वेदों के अधिष्ठाता हैं, फिर भी सृष्टि-कर्म की प्रवृत्ति ने उनकी बुद्धि को कुछ समय के लिए आच्छादित कर दिया। सनकादिक का प्रश्न बहुत सूक्ष्म था: मन और विषयों की परस्पर आसक्ति कैसे टूटे। यह केवल सृष्टि-विज्ञान का प्रश्न नहीं, बल्कि मोक्ष का गूढ़ रहस्य था। ब्रह्मा ने अपनी सीमा पहचानी और भगवान विष्णु का ध्यान किया। तब भगवान हंस रूप में प्रकट होकर उत्तर देने लगे।
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