विस्तृत उत्तर
सनकादिक मुनियों ने ब्रह्मा जी से मोक्ष का अत्यंत गूढ़ प्रश्न पूछा। उन्होंने कहा कि जीव का मन विषयों में प्रवेश करता है और विषय भी वासना तथा संस्कारों के रूप में मन में प्रवेश कर जाते हैं। दोनों का संबंध इतना गहरा हो जाता है कि उन्हें अलग करना कठिन प्रतीत होता है। इसलिए उन्होंने पूछा कि जो साधक मोक्ष चाहता है, वह मन और विषयों के इस चक्र को कैसे तोड़े। यह प्रश्न वेदांत और योग का मुख्य प्रश्न है। ब्रह्मा जी इसका संतोषजनक उत्तर न दे सके, इसलिए उन्होंने भगवान विष्णु का ध्यान किया। तब हंस अवतार प्रकट हुआ।
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