विस्तृत उत्तर
नीर-क्षीर विवेक का अर्थ है सार और असार में भेद करने की क्षमता। परंपरा में कहा जाता है कि हंस दूध और पानी के मिश्रण में से दूध ग्रहण कर जल छोड़ देता है। यह भौतिक प्रयोग से अधिक आध्यात्मिक प्रतीक है। साधक को भी शरीर और आत्मा, माया और ब्रह्म, विषय और सत्य में भेद करना आना चाहिए। भगवान विष्णु ने हंस अवतार इसी कारण लिया कि वे सनकादिक मुनियों को विवेक का मार्ग दिखाएँ। नीर-क्षीर विवेक से साधक जानता है कि शरीर और मन अस्थायी हैं, जबकि आत्मा शाश्वत साक्षी है।
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